सपनों की रील: नींद के परदे पर सपनों का सिनेमा... अब आपकी नींद का भी बनेगा वीडियो!
एक स्टार्टअप ने बनाई ऐसी डिवाइस जो इंसानी सपनों को स्क्रीन पर उतार सकती है
एजेंसी। क्या होगा अगर आप सुबह उठकर अपने सपनों को ठीक वैसे ही देख पाएं जैसे कोई फिल्म देख रहे हों? यही काम करने जा रही है एक नई डिवाइस, जिसे अमेरिकी कंपनी ‘मॉडम वर्क्स’ ने बनाया है। यह मशीन इंसान के सपनों को रिकॉर्ड करके AI की मदद से एक वीडियो में बदल देती है।
कैसे काम करती है यह तकनीक?
यह डिवाइस सीधे दिमाग नहीं पढ़ती। बल्कि इंसान जब नींद से जागता है और अपने सपनों को शब्दों में बयान करता है, तो AI उस बयान को सुनकर एक छोटा वीडियो तैयार कर देता है। फिलहाल यह वीडियो धुंधला और सरल होता है, लेकिन सपनों का मोटा-मोटा चित्रण कर देता है।
DIY मॉडल, जेब पर कितना भारी?
यह मशीन डू-इट-योरसेल्फ (DIY) मॉडल पर बनी है। कंपनी ने इसे ओपन-सोर्स रखा है और पार्ट्स की पूरी लिस्ट जारी की है। कोई भी इसे 3D प्रिंटिंग से असेंबल कर सकता है। तैयार करने में करीब ₹25,000 का खर्च आता है। इसमें न तो कोई नोटिफिकेशन है और न ही ऐप सपोर्ट। एक बार में यह 7 सपनों की वीडियो फाइल स्टोर कर सकती है।
पहले भी हुए हैं प्रयोग
यह पहली कोशिश नहीं है। 2023 में जापान के वैज्ञानिकों ने MRI स्कैन पर आधारित एक सिस्टम बनाया था, जो 60% सटीकता से सपनों को विजुअलाइज करता था। नई डिवाइस उसी दिशा में एक और कदम मानी जा रही है।
सपनों की दुनिया - क्या सच, क्या सवाल?
विज्ञान कहता है कि सपने हमारे अवचेतन की झलक होते हैं। अब जब उन्हें रिकॉर्ड करने की तकनीक आ रही है, तो सवाल भी खड़े होते हैं- क्या यह हमारी प्राइवेसी में दखल है? क्या सपनों की निगरानी से इंसान के दिमागी राज़ खोले जा सकते हैं? या फिर यह तकनीक हमें हमारी ही मानसिक दुनिया को बेहतर समझने का मौका देगी?
भविष्य की झलक
सोचिए, मनोविज्ञान, फिल्म इंडस्ट्री, मेडिकल साइंस-हर जगह यह तकनीक क्रांति ला सकती है। अवसाद से जूझ रहे मरीज के सपनों को देखकर डॉक्टर बेहतर इलाज तय कर सकते हैं। या फिर कोई कलाकार अपने सपनों को सीधे पर्दे पर उतार सकेगा।

