नवरात्रि 2025: शक्ति साधना का महापर्व, जानें नौ दिनों का महत्व, रंग और भोग

आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में मां के किस स्वरूप की पूजा की जाती है और हर दिन का क्या विशेष रंग और भोग है।

Sep 22, 2025 - 19:57
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नवरात्रि 2025: शक्ति साधना का महापर्व, जानें नौ दिनों का महत्व, रंग और भोग
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शक्ति आराधना का महापर्व नवरात्रि, इस वर्ष आश्विन शुक्ल प्रतिपदा यानी 22 सितंबर से प्रारंभ हो रहा है। यह उत्सव 01 अक्टूबर को महानवमी पर मां सिद्धिदात्री की पूजा-आराधना के साथ सम्पन्न होगा। नवरात्रि को शक्ति साधना का सबसे पवित्र पर्व माना जाता है, और पूरे भारत में, विशेषकर शारदीय और चैत्र नवरात्रि, बड़े श्रद्धा भाव और धूमधाम से मनाए जाते हैं।

देवी भागवत और मार्कंडेय पुराण के अनुसार, देवी दुर्गा ही सृष्टि की सृजनकर्ता, पालनकर्ता और संहारकर्ता हैं। नवरात्रि के इन नौ दिनों में, भक्तगण मां के नौ दिव्य स्वरूपों की पूजा-अर्चना करते हैं, जिन्हें नवदुर्गा कहा जाता है। प्रत्येक दिन देवी के एक विशेष रूप की उपासना की जाती है, जिससे भक्तों को भिन्न-भिन्न फल और सिद्धियों की प्राप्ति होती है। कई लोग इन नौ दिनों में उपवास रखते हैं या सात्विक भोजन करते हैं।

आइए जानते हैं नवरात्रि के नौ दिनों में मां के किस स्वरूप की पूजा की जाती है और हर दिन का क्या विशेष रंग और भोग है।

प्रथम दिन: मां शैलपुत्री

  • स्वरूप: पर्वतराज हिमालय की कन्या और वृषभ पर सवार मां शैलपुत्री का स्वरूप साधक को आत्मबल और स्थिरता प्रदान करता है।

  • रंग: सफेद

  • भोग: इस दिन मां को घी या घी से बनी सफेद चीजों (जैसे खीर) का भोग लगाना शुभ माना जाता है।

द्वितीय दिन: मां ब्रह्मचारिणी

  • स्वरूप: तपस्या और संयम की प्रतीक मां ब्रह्मचारिणी के पूजन से साधक में धैर्य, त्याग और ज्ञान की वृद्धि होती है।

  • रंग: लाल

  • भोग: मां ब्रह्मचारिणी को शक्कर, चीनी या मिश्री से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है।

तृतीय दिन: मां चंद्रघंटा

  • स्वरूप: इनके मस्तक पर अर्धचंद्र सुशोभित है और इनकी घंटा ध्वनि से असुरों का नाश होता है। इनकी उपासना से भय, शत्रु और विघ्न दूर होते हैं।

  • रंग: नीला

  • भोग: तीसरे दिन मां को दूध या दूध से बनी मिठाइयों का भोग अर्पित किया जाता है।

चतुर्थ दिन: मां कूष्मांडा

  • स्वरूप: ब्रह्मांड की आदिशक्ति मानी जाने वाली मां कूष्मांडा के पूजन से स्वास्थ्य, ऊर्जा और समृद्धि की प्राप्ति होती है।

  • रंग: पीला

  • भोग: इस दिन मां को मालपुआ का भोग लगाया जाता है।

पंचम दिन: मां स्कंदमाता

  • स्वरूप: भगवान कार्तिकेय की माता होने के कारण इन्हें स्कंदमाता कहा जाता है। इनकी कृपा से संतान सुख, पारिवारिक सुख और उन्नति प्राप्त होती है।

  • रंग: हरा

  • भोग: मां स्कंदमाता को केले या कच्चे केले की बर्फी का भोग लगाया जाता है।

षष्ठम दिन: मां कात्यायनी

  • स्वरूप: ऋषि कात्यायन की पुत्री मां कात्यायनी की उपासना से विवाह में आने वाली बाधाएं दूर होती हैं और इच्छित जीवनसाथी की प्राप्ति होती है।

  • रंग: भूरा (ग्रे)

  • भोग: छठे दिन मां को शहद या शहद से बनी खीर का भोग लगाना उत्तम माना गया है।

सप्तम दिन: मां कालरात्रि

  • स्वरूप: इनका रूप भयंकर है, किंतु ये भक्तों के सभी भय दूर कर शुभ फल प्रदान करती हैं। इनकी उपासना से नकारात्मक शक्तियां नष्ट होती हैं।

  • रंग: नारंगी

  • भोग: मां कालरात्रि को गुड़ या गुड़ से बने हलवे का भोग लगाया जाता है।

अष्टम दिन: मां महागौरी

  • स्वरूप: अत्यंत गौर वर्ण वाली और श्वेत वस्त्र धारण करने वाली मां महागौरी की कृपा से जीवन के समस्त दुख और दरिद्रता दूर होती है।

  • रंग: पीकॉक ग्रीन (मोरपंखी हरा)

  • भोग: अष्टमी के दिन मां को नारियल या नारियल से बनी चीजों का भोग लगाया जाता है।

नवम दिन: मां सिद्धिदात्री

  • स्वरूप: नवरात्रि के अंतिम दिन पूजी जाने वाली मां सिद्धिदात्री आठों सिद्धियां और नौों निधियां प्रदान करने वाली हैं। इनकी कृपा से साधक के जीवन में सफलता और पूर्णता आती है।

  • रंग: गुलाबी

  • भोग: नवमी के दिन माता को हलवा-पूरी और चने का भोग लगाया जाता है।

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com