अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन उपयोग: मस्तिष्क, मानसिकता और परिवार पर प्रभाव एवं समाधान
अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन उपयोग से मस्तिष्क में डोपामाइन असंतुलन पैदा होता है, जिससे मानसिक स्वास्थ्य समस्याएं और सामाजिक अलगाव जैसी गंभीर समस्याएं उत्पन्न हो सकती हैं। समय सीमा निर्धारण, ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देना और पेशेवर सहायता से इस लत को नियंत्रित किया जा सकता है।
आजकल की डिजिटल दुनिया में स्मार्टफोन, टैबलेट और कंप्यूटर हमारे जीवन का अभिन्न हिस्सा बन गए हैं। हालांकि ये उपकरण शिक्षा, मनोरंजन और संचार के लिए उपयोगी हैं, लेकिन इनका अत्यधिक और अनियंत्रित उपयोग मस्तिष्क, मानसिकता और परिवारिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। विशेष रूप से बच्चों और युवाओं में यह समस्या तेजी से बढ़ रही है, जो चिंता का विषय है।
डोपामाइन और मस्तिष्क पर प्रभाव
जब हम मोबाइल या कंप्यूटर पर कोई आकर्षक सामग्री देखते हैं, तो मस्तिष्क में डोपामाइन नामक रसायन का स्राव होता है, जो सुख और संतोष का अहसास कराता है। सोशल मीडिया, गेम्स और वीडियो स्ट्रीमिंग प्लेटफ़ॉर्म्स इस प्रक्रिया को उत्तेजित करते हैं, जिससे मस्तिष्क की इनाम प्रणाली सक्रिय होती है। यह प्रक्रिया मस्तिष्क को इस सामग्री के प्रति आदी बना देती है, जिससे समय के साथ डोपामाइन की सामान्य मात्रा से संतुष्ट होना मुश्किल हो जाता है। परिणामस्वरूप, व्यक्ति अधिक समय तक स्क्रीन के सामने बैठने की इच्छा महसूस करता है, जो स्क्रीन की लत का कारण बनता है।
बच्चों पर प्रभाव
बच्चों का मस्तिष्क विकासशील अवस्था में होता है, और अत्यधिक स्क्रीन समय उनके मानसिक और शारीरिक विकास को प्रभावित कर सकता है। शोध से पता चला है कि अत्यधिक स्क्रीन समय से बच्चों में ध्यान केंद्रित करने में कठिनाई, नींद की समस्याएं, और अवसाद जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। इसके अतिरिक्त, स्क्रीन पर अत्यधिक हिंसक या तेज़ गति वाली सामग्री देखने से बच्चों में आक्रामक व्यवहार और सामाजिक अलगाव की समस्या बढ़ सकती है। उदाहरण के लिए, गाज़ियाबाद स्वास्थ्य विभाग ने बच्चों में स्मार्टफोन के अत्यधिक उपयोग से जुड़ी चिंता व्यक्त की है, जिसमें चिंता, तनाव और सामाजिक अलगाव जैसे लक्षण शामिल हैं ।
वयस्कों पर प्रभाव
वयस्कों में भी अत्यधिक स्क्रीन समय मानसिक स्वास्थ्य समस्याओं का कारण बन सकता है। शोध से पता चला है कि अत्यधिक स्क्रीन समय से अवसाद, चिंता, तनाव और सामाजिक अलगाव जैसे लक्षण उत्पन्न हो सकते हैं। इसके अलावा, स्क्रीन के सामने अधिक समय बिताने से शारीरिक समस्याएं जैसे सिरदर्द, आंखों में तनाव और नींद की समस्याएं भी हो सकती हैं। उदाहरण के लिए, स्टैनफोर्ड मेडिसिन के शोधकर्ताओं ने बताया कि सोशल मीडिया ऐप्स मस्तिष्क में डोपामाइन का स्राव करते हैं, जिससे व्यक्ति आदी हो सकता है।
समाधान और नियंत्रण के उपाय
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समय सीमा निर्धारित करें: बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए स्क्रीन समय की सीमा निर्धारित करें। उदाहरण के लिए, दिन में अधिकतम 2 घंटे स्क्रीन समय निर्धारित करें।
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ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा दें: बच्चों को बाहर खेलने, किताबें पढ़ने और पारिवारिक गतिविधियों में भाग लेने के लिए प्रेरित करें।
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सोशल मीडिया और गेम्स के लिए समय निर्धारित करें: बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए सोशल मीडिया और गेम्स के लिए विशेष समय निर्धारित करें, ताकि वे अन्य गतिविधियों में भी शामिल हो सकें।
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सकारात्मक उदाहरण प्रस्तुत करें: बच्चों के लिए स्क्रीन समय के नियमों का पालन करते हुए, स्वयं भी स्क्रीन समय को नियंत्रित करें।
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पेशेवर सहायता लें: यदि स्क्रीन लत गंभीर हो, तो मानसिक स्वास्थ्य विशेषज्ञ से परामर्श लें।
निष्कर्ष
अत्यधिक मोबाइल और स्क्रीन उपयोग मस्तिष्क, मानसिकता और परिवारिक जीवन पर गंभीर प्रभाव डाल सकता है। बच्चों और वयस्कों दोनों के लिए स्क्रीन समय को नियंत्रित करना और ऑफलाइन गतिविधियों को बढ़ावा देना आवश्यक है। सही दिशा-निर्देश और परिवारिक सहयोग से हम इस समस्या का समाधान कर सकते हैं और एक स्वस्थ डिजिटल जीवन जी सकते हैं।

