किशोरों का मार्गदर्शन और Ikigai दर्शन: पालन-पोषण की एक नई दिशा

Jul 19, 2025 - 16:36
Jul 25, 2025 - 14:30
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किशोरों का मार्गदर्शन और Ikigai दर्शन: पालन-पोषण की एक नई दिशा
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सकारात्मक पालन-पोषण और किशोर विकास

किशोरावस्था वह मोड़ होती है जहाँ बचपन की सरलता और व्यस्क जीवन की जटिलता के बीच बच्चे अपनी पहचान तलाशते हैं। यह उम्र नई ऊर्जा, उत्सुकता, विद्रोह और आत्म-अन्वेषण की होती है। इस दौर में बच्चों का मार्गदर्शन करना कभी-कभी चुनौतीपूर्ण हो सकता है, लेकिन जापानी जीवन दर्शन Ikigai के माध्यम से यह कार्य सहज, सकारात्मक और प्रेरणादायक बन सकता है।

यह लेख आपको बताएगा कि Ikigai के मूल सिद्धांतों के साथ आप अपने किशोर बच्चों को आत्म-खोज, आत्म-निर्भरता और संतुलित जीवन जीने की प्रेरणा कैसे दे सकते हैं।

जीवन के उद्देश्य की खोज: क्या है Ikigai?

Ikigai जापान की एक जीवनदर्शन पद्धति है, जिसका शाब्दिक अर्थ है – "जीवन जीने का कारण"। यह दर्शन मानता है कि हर व्यक्ति का जीवन तभी सार्थक होता है जब वह चार प्रमुख प्रश्नों का उत्तर खोज ले:

मुझे किस चीज़ से प्रेम है?

मैं किस चीज़ में अच्छा हूँ?

दुनिया को मेरी किन योग्यताओं की ज़रूरत है?

मैं किस चीज़ से अपनी जीविका चला सकता हूँ?

जब इन चारों प्रश्नों का उत्तर एक ही केंद्र बिंदु पर आकर मिलता है, वहीं Ikigai जन्म लेता है – एक ऐसा उद्देश्य जो जीवन को अर्थ, दिशा और सुकून देता है।

किशोर और Ikigai: क्या है संबंध?

किशोर जीवन के वे वर्ष होते हैं जब व्यक्ति पहली बार यह सोचता है कि वह कौन है, क्या बनना चाहता है और उसका जीवन क्यों महत्वपूर्ण है। इस काल में सही मार्गदर्शन न मिलने पर बच्चा भटक सकता है या बाहरी दबावों में खो सकता है। यदि इस समय उसे Ikigai के चार स्तंभों की ओर उन्मुख किया जाए, तो वह अपने भीतर के संभावनाओं को समझना शुरू करता है।

अभिभावकों की भूमिका यहाँ अत्यंत महत्वपूर्ण हो जाती है। उन्हें बच्चों के जीवन को नियंत्रित नहीं करना है, बल्कि उन्हें उनके भीतर के उद्देश्य को पहचानने में सहायता करनी है।

आत्म-खोज की शुरुआत: जब सवाल बनते हैं साथी

किशोरों से यह उम्मीद रखना कि वे पहले से ही जानते हैं कि वे क्या बनना चाहते हैं – नासमझी होगी। उन्हें समय और प्रयोग की छूट दी जानी चाहिए। उन्हें विभिन्न रुचियों को आज़माने का अवसर दें – कला, विज्ञान, खेल, लेखन, संगीत, थिएटर आदि।

यह महत्वपूर्ण है कि आप उन्हें बिना आलोचना के देखने की आदत डालें। यदि वे असफल होते हैं, तो उसे प्रयोग की तरह लें – न कि विफलता की तरह। उनके साथ यह संवाद बनाए रखें कि वे क्या सोचते हैं, क्या महसूस करते हैं, और उन्हें सबसे अधिक उत्साह किन कार्यों में आता है।

संवाद की कला: जब मार्गदर्शन आदेश नहीं होता

बहुत से अभिभावक किशोरों से बात तो करते हैं, लेकिन उन्हें सुनते नहीं। किशोरावस्था में बच्चे यह महसूस करना चाहते हैं कि उनकी बातों को गंभीरता से लिया जा रहा है। उनके विचारों को महत्व देना ही संवाद का मूल है।

इस संवाद में “मैं तुम्हारे लिए हूँ” जैसी भाषा का इस्तेमाल करें, न कि “मैंने कहा है तो करना पड़ेगा” जैसी। खुली बातचीत बच्चों को यह सिखाती है कि वे खुद को अभिव्यक्त कर सकते हैं और उनकी भावनाएँ मायने रखती हैं।

असफलता को स्वीकार करना: डर नहीं, सीखने का अवसर

हमारे समाज में बच्चों से अक्सर यह अपेक्षा की जाती है कि वे हर परीक्षा, हर प्रतियोगिता में सफल हों। लेकिन असफलता एक आवश्यक अनुभव है – वह अनुभव जो उन्हें और अधिक परिपक्व बनाता है।

Ikigai दर्शन यह मानता है कि असफलता के बिना उद्देश्य की खोज अधूरी है। जब बच्चा किसी प्रयास में सफल नहीं हो पाता, तो अभिभावकों को उसे यह समझाना चाहिए कि यह अंत नहीं बल्कि सीखने की शुरुआत है।

यह और भी बेहतर होगा अगर आप अपने जीवन की असफलताओं के अनुभव साझा करें – ताकि बच्चा जाने कि हर गलती से एक नई समझ उपजती है।

संतुलन का पाठ: जब पढ़ाई के साथ जीवन भी ज़रूरी होता है

Ikigai संतुलन का पक्षधर है। किशोरों को केवल पढ़ाई तक सीमित करना, उन्हें थकाने वाला और एकांगी बना सकता है। जरूरी है कि बच्चे पढ़ाई के साथ-साथ रचनात्मक गतिविधियों, विश्राम, और पारिवारिक समय के लिए भी समय निकालें।

एक सप्ताहिक समय-सारणी जिसमें "अभ्यास", "मनोरंजन", "शारीरिक गतिविधि", और "ध्यान/शांति" जैसे खंड शामिल हों, उन्हें संतुलित जीवन जीने का अभ्यास सिखा सकती है।

मूल्य और आत्मनियंत्रण: चरित्र निर्माण का आधार

Ikigai केवल करियर या आर्थिक सफलता की बात नहीं करता। यह एक अच्छा इंसान बनने की शिक्षा भी देता है। किशोरों को आत्मनियंत्रण, ईमानदारी, सहानुभूति, और धैर्य जैसे मूल्यों से परिचित कराना ज़रूरी है।

परिवार में ऐसे अभ्यास शुरू किए जा सकते हैं जहाँ हर सप्ताह एक नैतिक मूल्य पर चर्चा हो। बच्चे कहानियों, फिल्मों या पारिवारिक अनुभवों से इन मूल्यों को गहराई से समझ सकते हैं।

समय की समझ और प्राथमिकता तय करना

Ikigai दर्शन यह भी सिखाता है कि समय सबसे मूल्यवान संसाधन है। किशोरों को यह सिखाना चाहिए कि वे अपने दिन की प्राथमिकताओं को तय करें। कौन सा कार्य तत्काल है, कौन सा महत्त्वपूर्ण है, और किसे टाल सकते हैं – यह समझ उन्हें अनुशासित बनाती है।

बच्चों के साथ सप्ताहिक योजना बनाने का अभ्यास करें। हर रविवार को अगले सप्ताह के तीन सबसे ज़रूरी कार्य बच्चे से खुद तय कराएं। इससे उनमें आत्म-प्रबंधन की भावना विकसित होगी।

प्रेरणादायक उदाहरण: आरव की खोज

आरव, 15 वर्ष का छात्र, पढ़ाई में औसत था लेकिन संगीत से उसे खास लगाव था। उसके माता-पिता पहले उसे केवल एक डॉक्टर बनाने का सपना देख रहे थे। लेकिन जब उन्होंने Ikigai के सिद्धांतों को समझा, तो उन्होंने आरव को उसकी रुचि के अनुसार मार्गदर्शन देना शुरू किया।

आरव ने संगीत रचना सीखी, और आज स्कूल में एक सक्रिय संगीतकार है। उसकी आत्मा और आत्मबल दोनों मजबूत हुए हैं। उसने अपने जीवन का उद्देश्य पाया — “मैं संगीत के माध्यम से दूसरों को राहत और आनंद देना चाहता हूँ।”

निष्कर्ष: बच्चे को बनाएँ नहीं, उसे खोजने दें

हर किशोर एक संभावनाओं का भंडार है। उसे अपने जीवन के उद्देश्य तक पहुँचने में समय, समर्थन और सहानुभूति की आवश्यकता होती है। यदि माता-पिता उसे दिशा दिखाने की जगह साथ चलने वाले बन जाएँ, तो Ikigai उसके जीवन में स्पष्टता, स्थिरता और प्रेरणा ला सकता है।

बच्चों को जीवन की दौड़ में धकेलने की जगह, उन्हें जीवन की खोज में साथी बनाएं। तभी वे अपने अंदर की रोशनी को पहचान पाएंगे — और वही रोशनी उनका Ikigai होगी।

निष्कर्ष: आप अपने बच्चे के Ikigai Mentor बनें

"किशोर जीवन में उलझन है, सवाल हैं, असमंजस है। पर एक समझदार माता-पिता वह आईना होता है जो न केवल चेहरा दिखाता है, बल्कि रास्ता भी।"

अपने बच्चों की आंतरिक आवाज़ सुनें, और उन्हें खुद बनने का मौका दें। Ikigai उनके जीवन को अर्थ, संतुलन और आनंद से भर देगा — बशर्ते आप उन्हें यह खोजने में साथ दें।

संदर्भ स्रोत

  • Ikigai for Teens – by Héctor García and Francesc Miralles

  • The Whole-Brain Child – by Daniel J. Siegel and Tina Payne Bryson

  • भारतीय किशोर मनोविज्ञान पर डॉ. आनंद नाडकर्णी के विचार

  • UNICEF India – किशोर स्वास्थ्य व मानसिक विकास रिपोर्ट

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com