डोनाल्ड ट्रंप को टैरिफ पर झटका, कोर्ट ने बताया अवैध; राष्ट्रपति बोले– “लड़ाई सुप्रीम कोर्ट तक जाएगी”
वॉशिंगटन। अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप को उनकी टैरिफ पॉलिसी पर बड़ा झटका लगा है। वॉशिंगटन डीसी स्थित यूएस कोर्ट ऑफ अपील्स फॉर द फेडरल सर्किट ने शनिवार को आदेश दिया कि ट्रंप ने आपातकालीन शक्तियों का हवाला देकर जो टैरिफ लगाए थे, वे उनके अधिकार क्षेत्र से बाहर हैं और अवैध हैं। अदालत ने कहा कि राष्ट्रपति को कानून के तहत सीधे टैरिफ या कर लगाने की शक्ति नहीं दी गई है।
ट्रंप ने अदालत के फैसले पर कड़ा पलटवार किया और सोशल मीडिया पर लिखा—
“सभी टैरिफ अब भी लागू हैं! एक पक्षपाती अदालत ने गलत कहा है कि हमारे टैरिफ हटाए जाने चाहिए, लेकिन आखिरकार जीत अमेरिका की ही होगी। अगर टैरिफ हटे तो यह देश के लिए ‘पूर्ण आपदा’ होगी।”
राष्ट्रपति ने आगे कहा कि टैरिफ ही अमेरिका की सबसे बड़ी ताकत हैं। उन्होंने लेबर डे वीकेंड का हवाला देते हुए कहा—
“टैरिफ हमारे कामगारों और ‘मेड इन अमेरिका’ उत्पाद बनाने वाली कंपनियों का सबसे बड़ा हथियार हैं। सुप्रीम कोर्ट की मदद से हम इन्हें देशहित में इस्तेमाल करेंगे और अमेरिका को फिर से मजबूत बनाएंगे।”
अदालत का तर्क
कोर्ट ने कहा कि ट्रंप ने इंटरनेशनल इमरजेंसी इकोनॉमिक पावर्स एक्ट (IEEPA)-1977 का गलत इस्तेमाल किया। यह कानून आपातकालीन स्थिति में विदेशी संपत्ति फ्रीज करने या व्यापार प्रतिबंध लगाने के लिए है, न कि टैरिफ लगाने के लिए। अदालत के अनुसार, संविधान के तहत टैरिफ लगाने का अधिकार केवल कांग्रेस के पास है।
इस फैसले के बाद अप्रैल में लगाए गए रिसिप्रोकल टैरिफ और फरवरी में चीन, कनाडा व मेक्सिको पर लगाए गए कुछ शुल्क रद्द कर दिए गए हैं। हालांकि, स्टील और एल्युमिनियम पर लगे टैरिफ फिलहाल जारी रहेंगे।
यह याचिका पांच छोटे अमेरिकी व्यवसायों और 12 डेमोक्रेट शासित राज्यों ने दायर की थी, जिन्होंने दलील दी कि राष्ट्रपति ने संवैधानिक सीमाओं से बाहर जाकर कदम उठाया।

