कठिन ड्यूटी, लंबी रातें, लगातार जनसेवा… और अब एक शांत जीवन की शुरुआत
चार दशक की सेवा के बाद विदाई… पुलिस परिवार ने नम आंखों से कहा धन्यवाद
भावुक विदाई समारोह में डीआईजी व एसएसपी ने की सराहना, परिवारजनों ने साझा कीं ड्यूटी की चुनौतियां
रायपुर। “वर्दी पहनी थी, जिम्मेदारियों का बोझ भी उठाया था… आज सिर झुकाकर सम्मान लिया, तो आंखें नम हो गईं।” पुलिस विभाग में चार दशक तक सेवा देने वाले पांच जांबाज अधिकारी-कर्मचारियों को 31 जुलाई को उनके सेवानिवृत्त होने पर एक गरिमामय विदाई दी गई। यह सिर्फ एक औपचारिक कार्यक्रम नहीं था, बल्कि भावनाओं और कर्तव्यनिष्ठा का वो दृश्य था, जहां एक-एक मुस्कान के पीछे बीते वर्षों की कठिन ड्यूटी और संघर्ष छुपा था। सेवानिवृत्त होने वालों में उप निरीक्षक वीरेन्द्र धर दीवान, सहायक उप निरीक्षक बृजराज सिंह, भगवान यादव, प्रधान आरक्षक परशुराम साहू और आरक्षक बैण्ड पदुमलाल साहू शामिल हैं। इन सभी ने 34 से लेकर 42 वर्षों तक छत्तीसगढ़ पुलिस में निष्ठापूर्वक सेवा दी और समाज की सुरक्षा में अपना जीवन समर्पित किया।
पुलिस लाइन रायपुर में आयोजित इस विदाई समारोह में माहौल भावनात्मक हो गया जब एसएसपी डॉ. लाल उमेद सिंह ने सेवानिवृत्त अधिकारी-कर्मचारियों की कार्यशैली, सेवा भाव और अनुशासन की सराहना करते हुए उन्हें साल, श्रीफल, स्मृति चिन्ह और पेंशन प्रकरण से संबंधित दस्तावेज सौंपे। उन्होंने कहा – “इनकी सेवाएं आने वाली पीढ़ियों के लिए आदर्श बनेंगी। वर्दी को सम्मान देने वाले ये अधिकारी हमारे लिए प्रेरणा स्रोत हैं।” कार्यक्रम में सेवानिवृत्त अधिकारी और उनके परिजन भी शामिल हुए। कई ने मंच से अपने सेवा काल के अनुभव साझा किए और बताया कि ड्यूटी के दौरान किस तरह से उन्होंने त्योहार, परिवार और आराम को पीछे छोड़कर जनता की सेवा की।
परिजनों ने भी खुलकर अपनी बातें रखीं। किसी ने कहा कि “त्योहार के दिन जब पूरा मोहल्ला साथ होता था, तब घर खाली रहता था।” तो किसी ने बताया कि “जब रातभर ड्यूटी पर होते थे, तब मां बच्चों को यह कहकर सुला देती थी कि ‘पापा देश की रक्षा कर रहे हैं’।” डीएसपी निलेश द्विवेदी, रक्षित निरीक्षक अनीश सारथी, स्टेनो प्रथम सुरेश टण्डन, वरिष्ठ लिपिक पी.एस. यादव, स्थापना लिपिक जनक लाल रात्रे सहित पुलिस विभाग के कई अधिकारी भी इस भावुक पल के साक्षी बने। इन अधिकारियों ने न सिर्फ विभाग में अनुशासन और सेवा भावना का उदाहरण प्रस्तुत किया, बल्कि आने वाले जवानों के लिए आदर्श भी बने। पुलिस विभाग में यह परंपरा है कि सेवा से निवृत्त होने पर पुलिसकर्मियों को पूरे सम्मान के साथ विदाई दी जाती है – और यह समारोह उस परंपरा का एक गौरवशाली उदाहरण था।

