अवैध शराब की बिक्री से चौपट राजस्व, छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में मिलावटी शराब का जहर.
छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। घोटालेबाजों पर ना तो सरकार का डर है और ना ही कांग्रेस सरकार में हुए घोटाले की जांच का असर। आबकारी विभाग की निष्क्रियता के चलते गांव-गांव में कोचियों ने पांव पसार लिए हैं। आलम यह है कि हर गांव गली मोहल्ले में शराब आसानी से उपलब्ध है। सरकारी शराब दुकानों से प्रति पेटी 200 से 300 की कमीशन पर माफियाओं से शराब मिल रही है। इतना ही नहीं रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शराब की दुकानों में शराब प्रेमियों से ओवर रेट लिए जा रहे हैं।
अवैध शराब की बिक्री से चौपट राजस्व, छत्तीसगढ़ के गांव-गांव में मिलावटी शराब का जहर
कृष्ण कुमार सिकंदर: रायपुर। छत्तीसगढ़ में शराब घोटाले का सिलसिला थमने का नाम नहीं ले रहा है। घोटालेबाजों पर ना तो सरकार का डर है और ना ही कांग्रेस सरकार में हुए घोटाले की जांच का असर। आबकारी विभाग की निष्क्रियता के चलते गांव-गांव में कोचियों ने पांव पसार लिए हैं। आलम यह है कि हर गांव गली मोहल्ले में शराब आसानी से उपलब्ध है। सरकारी शराब दुकानों से प्रति पेटी 200 से 300 की कमीशन पर माफियाओं से शराब मिल रही है। इतना ही नहीं रायपुर, दुर्ग और बिलासपुर में शराब की दुकानों में शराब प्रेमियों से ओवर रेट लिए जा रहे हैं।
अवैध आहाता सेंटरों से लाखों की वसूली
बाहरी राज्य के नकली शराब से राजस्व चौपट
प्रदेश के बिलासपुर,दुर्ग और रायपुर में अन्य राज्यों की शराब की बड़ी खेंप लगातार आ रही है। ऐसे में राजस्व की वसूली होती नहीं दिख रही है। पुलिस विभाग व्दारा अन्य राज्यों की शऱाब से बड़े प्रकरण बनाए गए है, जबकि आबकारी विभाग सिर्फ वसूली में व्यस्त है। मुख्यमंत्री के गृह जिले जशपुर में पिछले दिनों पुलिस ने झारखंड की शराब बड़ी मात्रा लगभग 800 पेटी पकड़ी। ऐसी कई गाड़ियां प्रतिदिन छत्तीसगढ़ की सीमा में प्रवेश कर रही हैं और राजस्व को चुना लगाया जा रहा है।
कहां जा रही अवैध कमाई
सूत्र बताते हैं कि आबकारी विभाग के बड़े पहुंच वाले एक अधिकारी ने अपने चहेतों से बड़े जिलों में बिठाकर अवैध वसूली से केंद्रीत कर रखा है। यह बड़ी रकम कहां जा रही है। यह बड़ा प्रश्न है।
दुकानों से ब्रांडेंड शराब गायब
दुकानों में लोकल निम्न स्तर के गुणवत्ता विहीन शराब की बिक्री हो रही है। ग्राहकों की मांग अनुसार राशन नहीं मिल रही है। अच्छे ब्रांड दुकानों से गायब है।
कमीशन की भेंट चढ़ गई शराब दुकानें.
सीएसबीपी छत्तीसगढ़ ब्रेवेज कार्पोरेशन में एक ADEO स्तर के अधिकारी स्थानीय शराब निर्माताओं से क्यों वसूली करते हैं और ये पैसा कहां जाता है। आबकारी विभाग में इसको लेकर खासा चर्चा है। कुछ का मानना है कि इसकी जांच EOW या ACB से करवानी चाहिए।

