18 अगस्त को साय कैबिनेट विस्तार! तीन नए चेहरे होंगे शामिल
गजेंद्र, राजेश और खुशवंत के नाम पर चर्चा तेज
भास्कर दूत
दिनेश यदु @ रायपुर। छत्तीसगढ़ की राजनीति इस वक्त बेहद गर्म है। लंबे इंतजार के बाद आखिरकार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय ने मंत्रिमंडल विस्तार के संकेत दे दिए हैं। सियासी गलियारों में चर्चा तेज है कि 18 अगस्त को मंत्रिमंडल का विस्तार होगा और तीन नए चेहरे मंत्री बनाए जाएंगे। मुख्यमंत्री साय ने शनिवार को मीडिया से चर्चा में कहा – “इंतजार कीजिए, बहुत जल्द विस्तार होगा।” उन्होंने इशारा किया कि यह विस्तार उनके विदेश दौरे से पहले भी हो सकता है।
क्षेत्रीय और जातीय समीकरण पर होगी बाज़ी
साय कैबिनेट फिलहाल मुख्यमंत्री समेत 11 मंत्रियों के सहारे चल रहा है। सरगुजा संभाग से सबसे ज्यादा मंत्री हैं, जबकि रायपुर, दुर्ग और बस्तर संभाग से सिर्फ एक-एक चेहरा है। बस्तर में फिलहाल केवल केदार कश्यप मंत्री हैं। राजनीतिक समीकरणों को साधने के लिए अब तीन नए नामों पर मुहर लग सकती है।
ओबीसी वर्ग से – गजेंद्र यादव
सामान्य वर्ग से – राजेश अग्रवाल
अनुसूचित जाति वर्ग से – गुरु खुशवंत साहेब
इन तीनों नेताओं का नाम मंत्रिमंडल में जोर-शोर से चर्चा में है।
हरियाणा फॉर्मूले पर छत्तीसगढ़ में प्रयोग!
राज्य की राजनीति में यह सवाल भी उठ रहा है कि आखिर इस बार मंत्रिमंडल में कुल कितने मंत्री होंगे। छत्तीसगढ़ में 90 विधायक हैं और नियम के मुताबिक 15% यानी अधिकतम 14 मंत्री बनाए जा सकते हैं। अब तक परंपरा सिर्फ 13 मंत्रियों की रही है, लेकिन सूत्रों की मानें तो साय सरकार हरियाणा की तर्ज पर मुख्यमंत्री समेत 14 मंत्रियों की टीम बना सकती है।
बृजमोहन के इस्तीफे से खाली हुआ था पद
गौरतलब है कि पहले साय कैबिनेट में 12 मंत्री थे, लेकिन लोकसभा चुनाव जीतने के बाद तत्कालीन शिक्षा मंत्री बृजमोहन अग्रवाल ने इस्तीफा दे दिया था। तब से मुख्यमंत्री साय सिर्फ 10 मंत्रियों के साथ सरकार चला रहे हैं। अब यह रिक्ति पूरी होने जा रही है।
राज्यपाल से मुलाकात ने बढ़ाई हलचल
सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार मुख्यमंत्री विष्णुदेव साय हाल ही में राज्यपाल रमेन डेका से राजभवन में मिले। चर्चा है कि इसी मुलाकात में मंत्रिमंडल विस्तार पर अंतिम मुहर लगी और 18 अगस्त की तारीख तय कर दी गई।
सियासी गलियारों में गहमागहमी
साय कैबिनेट विस्तार को लेकर राजनीतिक गलियारों में खलबली मच गई है। नए मंत्रियों के नामों को लेकर तरह-तरह की अटकलें लगाई जा रही हैं। संगठन के भीतर भी गतिविधियां तेज हो गई हैं और सत्ता के गलियारों से लेकर ज़मीनी राजनीति तक इस फैसले पर निगाहें टिकी हुई हैं।

