बस्तर में बाढ़ का कहर: 68 से ज्यादा ग्रामीण सुरक्षित निकाले गए, CM ने जापान से ली जानकारी
दरभा नाले में कार समेत बहे दंपति और दो बच्चे; हेलीकॉप्टर और नावों से तेज हुआ रेस्क्यू
बस्तर/रायपुर। बस्तर संभाग में मूसलाधार बारिश के बाद हालात बिगड़ गए हैं। दंतेवाड़ा, बीजापुर और बस्तर जिले में बाढ़ ने जनजीवन अस्त-व्यस्त कर दिया है। कई गांव पानी से घिर गए हैं, तो सड़कों का संपर्क भी टूट गया है। प्रशासन ने बचाव कार्यों के लिए हेलीकॉप्टर और नावें तैनात कर दी हैं। अब तक 68 से ज्यादा ग्रामीणों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है।
इस बीच दरभा नाले में एक कार बह जाने से बड़ा हादसा हो गया। कार में सवार दंपति और उनके दो मासूम बच्चे पानी के तेज बहाव में लापता हो गए। प्रशासन और बचाव दल लगातार उनकी तलाश में जुटे हैं। हादसे के बाद इलाके में दहशत और मातम का माहौल है।
मुख्यमंत्री ने जापान से ली स्थिति की जानकारी
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय फिलहाल जापान प्रवास पर हैं, लेकिन बस्तर की गंभीर स्थिति पर लगातार नज़र बनाए हुए हैं। उन्होंने राजस्व सचिव एवं आपदा राहत आयुक्त रीना बाबासाहेब कंगाले और बस्तर संभाग आयुक्त डोमन सिंह से फोन पर बातचीत कर राहत कार्यों की प्रगति जानी। सीएम ने अधिकारियों को निर्देश दिया कि—
एसडीआरएफ को हाई अलर्ट पर रखा जाए।
राहत कार्यों में किसी प्रकार की देरी या लापरवाही न हो।
निचले इलाकों में मुनादी कर लोगों को तुरंत सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया जाए।
रेस्क्यू अभियान: हेलीकॉप्टर और नावों की मदद
पिछले 24 घंटों में प्रशासन ने तेजी से राहत अभियान चलाया है। लोहंडीगुड़ा के मांदर गांव से 21 लोगों को एयरलिफ्ट किया गया। वहीं दंतेवाड़ा और बीजापुर में नावों और हेलीकॉप्टर की मदद से 68 से अधिक ग्रामीणों को सुरक्षित निकाला गया।
अधिकारियों के मुताबिक, पुलिस बल और एसडीआरएफ की टीमें लगातार प्रभावित गांवों तक पहुंचने की कोशिश कर रही हैं। कई गांव बाढ़ में पूरी तरह घिर गए हैं और केवल हवाई मदद से ही राहत पहुंचाई जा सकती है।
प्रभावित इलाकों का हाल
बस्तर, दंतेवाड़ा और बीजापुर जिले सबसे ज्यादा प्रभावित।
100 से अधिक गांव बाढ़ की चपेट में और कई गांवों का संपर्क टूटा।
जगदलपुर-सुकमा हाईवे जेयराम नाले के उफान से बंद पड़ा।
मौसम विभाग ने कई जिलों में भारी बारिश की चेतावनी जारी की।
लोगों की परेशानी
ग्रामीणों का कहना है कि अचानक पानी का स्तर बढ़ जाने से घरों और खेतों में पानी भर गया। मवेशी बह गए और जरूरी सामान छोड़कर उन्हें सुरक्षित स्थान की ओर भागना पड़ा। प्रशासन ने राहत शिविर बनाए हैं और भोजन-पानी की व्यवस्था की जा रही है।

