गणपति बप्पा मोरया अगले बरस तू जल्दी आ.... ,नम आंखों और भावुक मन से दी गई गणपति बप्पा को विदाई
नम आंखों और भावुक मन से दी गई गणपति बप्पा को विदाई
ढोल नगाड़ों पर नाचते- झूमते हुए नदी घाटों पर हुआ प्रतिमाओं का विसर्जन
रायपुर 7 सितंबर , दस दिनों की श्री गणेश उपासना का महापर्व गणपति उत्सव शनिवार को अनंत चतुर्दशी के अवसर पर बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन कर संपन्न हुआ। भक्तों ने धूमाल, ढोल ताशे और पारंपरिक गाजे-बाजे के साथ गणपति बप्पा को नम आंखों से विदाई दी। साथ ही अगले बरस जल्दी बप्पा के आने की कामना भी की।
गणपति को विदाई देने का सिलसिला तड़के सुबह से ही शुरू हो गया था जो अनवरत रविवार को भी जारी रहा। सबसे पहले लोगों ने विधिवत घरों, पंडालों और देव स्थानों पर भगवान गजानन की पूजा-अर्चना की। इसके पश्चात आरती कर विधिवत उनसे सुख-समृद्धि और खुशहाली की कामना की। इस दौरान रंग-अबीर लोगों ने बप्पा को लगाकर अपनी खुशी और बप्पा की विदाई को यादगार बनाया। बप्पा को अबीर लगाकर फिर क्या बच्चे, क्या बूढ़े और क्या महिलाएं.. सभी ने एक दूसरे को अबीर लगाकर खुशियों का इजहार किया। और फिर ढोल नगाड़ों की थाप पर नाचते झूमते हुए नदी घाटों में बप्पा की मूर्तियों का विसर्जन किया।
छोटी से लेकर बड़ी मूर्तियों के विसर्जन का सिलसिला जारी
शहर के महादेव घाट समेत अनेक तालाबों घाटों पर मूर्ति विसर्जन की प्रशासनिक व्यवस्था की गई है। यहां स्वच्छता और लोगों की सुरक्षा को ध्यान में रखकर विशेष लोगों की तैनाती प्रशासन ने की है ताकि कोई अप्रिय घटना घटित ना हो सके। वैसे शनिवार को ज्यादातर घरों और छोटे पांडालों की मूर्तियों का विसर्जन ही देखने को मिला। भक्तिमय वातावरण में सुबह से ही विसर्जन का सिलसिला शुरू हुआ जो रविवार को भी अनवरत जारी रहा।
निगम ने किया इको-फ्रेंडली तरीके से विसर्जन
इको-फ्रेंडली तरीके से गणपति बप्पा का विसर्जन किया। नगर निगम ने खारून नदी के महादेवघाट में विशेष अस्थायी विसर्जन कुण्ड बनाकर भक्तों को सुविधा दी। सुबह से ही बड़ी संख्या में श्रद्धालु यहाँ पहुँचने लगे। देर रात तक लगभग 5000 छोटी और 945 बड़ी मूर्तियों का विसर्जन किया गया।

