आरोप , एनएमडीसी के जीईसी रायपुर को बंद करके हैदराबाद ले जाने पर भाजपा नेता मौन क्यों हैं?
भास्कर दूत रायपुर , 1 अगस्त 2025, एनएमडीसी के ग्लोबल एक्सप्लोरेशन सेंटर (जीईसी) रायपुर को बंद करके हैदराबाद ले जाने के निर्णय को भाजपा की डबल इंजन सरकार का छत्तीसगढ़ विरोधी षडयंत्र करार दिया है। प्रदेश कांग्रेस कमेटी के प्रवक्ता सुरेंद्र वर्मा ने कहा है कि एनएमडीसी अपने कुल मुनाफे का 80 प्रतिशत लाभ केवल छत्तीसगढ़ से ही कमाती है, लेकिन मुख्यालय हैदराबाद में होने से टैक्स से हर साल मिलने वाला हजारों करोड़ का राजस्व तेलंगाना को जाता है। डबल इंजन की सरकार में छत्तीसगढ़ की उपेक्षा और भेदभाव चरम पर है।
उन्होंने कहा कि एनएमडीसी भर्ती में छत्तीसगढ़ के युवाओं को रोकने का षड्यंत्र भाजपा की सरकार में रचा गया, किरंदुल और बचेली के संयंत्रों के लिए हैदराबाद से की जाती है प्रक्रिया, भर्ती प्रक्रिया में छत्तीसगढ़ के युवाओं के लिए कोई प्राथमिकता तय नहीं है। ज़मीन हमारी, खनिज हमारा और हमारे ही प्रदेश के युवाओं को नौकरी देने में उपेक्षा?
वर्मा ने कहा है कि भारत सरकार का उपक्रम, एनएमडीसी, बैलाडीला क्षेत्र के लौह अयस्क का दोहन करती है। सर्वाधिक सक्रिय माइंस छत्तीसगढ़ में ही संचालित है, फिर भी मुख्यालय हैदराबाद में स्थित है, जो तर्कसंगत नहीं है। मुख्यालय छत्तीसगढ़ में नहीं होने की वजह से ही कॉरपोरेट टैक्स में राज्य सरकार का हिस्सा, जीएसटी से राज्यांश जैसे अनेकों लाभ तेलंगाना को मिल रहा है। पूर्व में परिस्थितियों अलग थी। हवाई, होटल और परिवहन सुविधाओं की वजह से मुख्यालय हैदराबाद में बनाया गया था, लेकिन अब छत्तीसगढ़ में वे सभी सुविधाएं विद्यमान है। खदान छत्तीसगढ़ में है, तो अब मुख्यालय भी प्रदेश में ही होना चाहिए।
वर्मा ने कहा है कि नया रायपुर में एनएमडीसी को मुख्यालय बनाने हेतु भूमि आवंटित है, जो खाली बंजर पड़ा हुआ है लेकिन उसमें मुख्यालय ना बनाकर उल्टे रायपुर में संचालित एनएमडीसी के ग्लोबल एक्सप्लोरेशन सेंटर (जीईसी) की तालाबंदी और हैदराबाद के निकट पटांचेरु (तेलंगाना) में भव्य भवन बनाकर मुख्यालय संचालन की तैयारी भाजपा की डबल इंजन सरकार कर रही है। छत्तीसगढ़ की पूर्ववर्ती कांग्रेस की सरकार के समय तत्कालीन मुख्यमंत्री भूपेश बघेल ने लगातार प्रयास किए, एनएमडीसी की भर्ती परीक्षा नागपुर के स्थान पर जगदलपुर और दंतेवाड़ा में लेने की शुरुआत हुई, मुख्यालय स्थानांतरित करने के लिए प्रधानमंत्री से मुलाकात और अनेकों पत्राचार किए, लेकिन केंद्र सरकार ने कोई कार्यवाही नहीं की केवल आश्वासन ही देते रहे।

