इधर LAC से हटा तो उधर ब्रह्मपुत्र नदी पर लगाया दिमाग, ड्रैगन करने जा रहा बड़ा खेल, और 'चमक' उठेगा चीन

भारत औ चीन के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलने लगी है. एलएससी से चीन पीछे हट गया है. शांति कायम करने की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. भारत-चीन के बीच सी

Dec 26, 2024 - 08:07
Dec 26, 2024 - 08:07
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इधर LAC से हटा तो उधर ब्रह्मपुत्र नदी पर लगाया दिमाग, ड्रैगन करने जा रहा बड़ा खेल, और 'चमक' उठेगा चीन
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भारत औ चीन के रिश्तों में जमी बर्फ अब पिघलने लगी है. एलएससी से चीन पीछे हट गया है. शांति कायम करने की कोशिशें रंग लाती दिख रही हैं. भारत-चीन के बीच सीमा पर शांति को लेकर बातचीत अब बहुत पॉजिटिव है. मगर दूसरी ओर ब्रह्मपुत्र नदी पर चीन एक अलग ही खेल खेलने की फिराक में है. जी हां, चीन ने ब्रह्मपुत्र नदी पर अपना दिमाग लगा दिया है. वह यहां डैम बनाने जा रहा है. अगर ऐसा संभव होता है तो चीन इतना बिजली पैदा करेगा कि उसका देश और चमक उठेगा. हालांकि, चीन के इस चाल से भारत को सचेत रहने की जरूरत है.
दरअसल, चीन करीब 75 साल पहले कब्जाए गए तिब्बत में अब दुनिया का सबसे बड़ा डैम बनाने जा रहा है. यह दुनिया की किसी भी पावर परियोजना से कई गुना अधिक महंगा और विशाल होगा. भारत की ब्रह्मपुत्र नदी तिब्बत में पहुंचकर यारलुंग त्‍सांगपो के नाम से जानी जाती है. इसी नदी पर चीन दुनिया का सबसे बड़ा और महंगा डैम बना रहा है. इसी के साथ भारत के लिए चीन पर सुरक्षा के लिहाज से निगाह रखने का काम और अधिक बढ़ जाएगा. तिब्बत की इसी सबसे लंबी नदी पर हाइड्रोपावर डैम बनाकर सालाना 300 बिलियन किलोवाट प्रति घंटे बिजली उत्पादन का योजना बनाए हुए है. यह पावरफुल प्लांट चीन के ही थ्री गॉर्जस डैम से तीन गुना अधिक बिजली पैदा करेगा. इसे बनाने में कुल लागत 1 ट्रिलियन युआन (137 बिलियन अमेरिकी डॉलर) यानी 10.96 लाख करोड़ रुपये से अधिक हो सकता है. यानी दुनिया में इससे महंगा कोई और ऐसा प्रोजेक्ट अभी तक नहीं बताया जा रहा है. तिब्बत के लोगों का सबसे बड़ा विरोध प्रदर्शन इसी को लेकर… हालांकि तिब्बत में इसका बड़े पैमान पर जोरदार विरोध पूरे साल से जारी है क्योंकि इसके बनते हुए न सिर्फ कई धार्मिक और पवित्र मठ डूब जाएंगे बल्कि हजारों तिब्बतियों को विस्थापन झेलना होगा. चीन की यह परियोजना डेगे और जियांगडा में फैली घाटी तक लागू होगी. चीन के सख्त नियमों और कानूनों के बीच तिब्बत के विरोध का कुछ असर तो नहीं हुआ है. चीन यह डैम एक्जेक्ट कहां बनाएगा और कब से इसे शुरू करेगा, यह पूरी तरह से गोपनीय रखा जा रहा है. अब तक के सबसे बड़े डैम से कितना आगे होगा यह… रिपोर्ट्स के मुताबिक चीन इसे ऐसी जगह पर बनाएगा जो सबसे अधिक वर्षा वाले हिस्से हैं. इस परियोजना से सालाना लगभग 300 बिलियन किलोवाट प्रति घंटे बिजली पैदा होगी. चीन का थ्री गॉर्जेस डैम अब तक का दुनिया का सबसे अधिक क्षमता वाला डैम है और यह को 88.2 बिलियन kWh तक बिजली पैदा कर सकता है. आसान नहीं है पूरी परियोजना को अमली जामा पहनाना… एक अनुमान के मुताबिक नदी की जलविद्युत क्षमता का इस्तेमाल करने के लिए नदी के आधे बहाव को लगभग 2000 क्यूबिक मीटर प्रति सेकंड की दर से मोड़ना होगा और इसके लिए नामचा बरवा पर्वत के जरिए चार से छह 20 किमी लंबी सुरंगें खोदी जानी होंगी. डैम की जगह एक टेक्टोनिक प्लेट सीमा के साथ है जहां भूकंप आ सकते हैं. पठार का भूविज्ञान मैदानों से काफी अलग होता है. इसलिए इसे बनाने और सुचारू चलाए रखना चीन के लिए इंजीनियरिंग और तकनीकी कोण से काफी मुश्किल होगा
Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com