हड़ताल स्वlस्थ मितानिन संघ ने सरकार के खिलाफ खोला मोर्चा
7 अगस्त से अनिश्चितकालीन हड़ताल पर हैं मितानिन
भास्कर दूत रायपुर, प्रदेश मितानिन संघ ने अपनी तीन सूत्रीय मांगों को लेकर सरकार के खिलाफ मोर्चा खोल दिया है। तूता धरना स्थल पर एक दिवसीय सांकेतिक धरना देने के बाद बीते 7 अगस्त से मितानिनें अनिश्चतकालीन हड़ताल पर चली गई हैं। जिससे स्वासथ्य व्यवस्था पूरी तरह चरमरा गई है।
स्वास्थ्य मितानिन संघ की पदाधिकारियों ने बताया कि 2023 के विधानसभा चुनाव में सरकार ने घोषणा पत्र में वादा किया था कि मितानिन, मितानिन प्रशिक्षक, हेल्प डेस्क फैसिलिटेटर और ब्लॉक कोऑर्डिनेटरों को एनएचएम् के अंतर्गत लाया जाएगा। इसके विपरीत, कार्यक्रम संचालन की जिम्मेदारी एक दिल्ली की एनजीओ को सौंप दिया गया। इससे मितानिनें ठगा हुआ महसूस कर रही हैं। उनका आरोप है कि पिछले 13 महीनों से वेतन/मानदेय का भुगतान 3-4 महीने के अंतराल में किये जाने से आर्थिक स्थिति खराब हो गई है। इसको लेकर 13 दिसंबर 2024 से अनिश्चितकालीन हड़ताल की गई थी। तब सरकार ने आश्वासन दिया था। अब तक सरकार द्वारा उनकी प्रमुख तीन मांगों उनकी 3 मुख्य मांगों में एनएचएम (NHM) में संविलियन, मानदेय में 50% वृद्धि और ठेका प्रथा खत्म करने की बात आदि की अनदेखी हो रही है। इसे लेकर संघ ने अनिश्चितकालीन काम बंद और कलम बंद आंदोलन शुरू कर दिया है। संघ का कहना है जब तक सरकार उनकी मांगों को पूरा नहीं करती, तब तक उनका यह आंदोलन जारी रहेगा।
वहीं संभागवार योजना के तहत सरगुजा संभाग की मितानिनों ने प्रदर्शन किया। प्रदेश के सभी संभागों में प्रदर्शन जारी है। सोमवार को बस्तर संभाग में भी मितानिन हड़ताल पर रही। वहीं राजधानी के तूता धरना स्थल पर एकत्रित होकर अपनी मांगों के समर्थन में आवाज बुलंद की। बता दें कि प्रदेशभर में मितानिनों की संख्या लगभग 72,000 है, जो ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में स्वास्थ्य सेवाओं की रीढ़ मानी जाती हैं। इनकी कामबंद हड़ताल से ग्रामीण स्वास्थ्य सेवाएं थप होने लगी हैं।

