बाघ और हिरण: जंगल में संतुलन की नई पहल

Aug 24, 2025 - 19:10
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बाघ और हिरण: जंगल में संतुलन की नई पहल
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सीतानदी-उदंती टाइगर रिज़र्व में छोड़े गए 35 चित्तीदार हिरण

दिनेश यदु 

रायपुर। गरियाबंद स्थित सीतानदी-उदंती टाइगर रिज़र्व (यूएसटीआर ) में वन विभाग ने एक महत्वपूर्ण कदम उठाया है। यहां बाघ और अन्य मांसाहारी जीवों के लिए प्राकृतिक शिकार की उपलब्धता बढ़ाने के उद्देश्य से नवा रायपुर स्थित जंगल सफारी से 35 चित्तीदार हिरणों को छोड़ा गया। इस पहल का मुख्य मकसद यह है कि बाघ, तेंदुआ और अन्य शिकारी जीव जंगल के भीतर ही अपने शिकार पर निर्भर रहें और इंसानी बस्तियों की ओर न बढ़ें।

बाघ और तेंदुआ न आएं रिहायशी इलाके

उपनिदेशक वरुण जैन ने बताया कि वर्तमान में रिज़र्व में 1 बाघ और 100 से अधिक तेंदुए मौजूद हैं। इसके साथ ही सियार, लकड़बग्घा, भालू और अन्य जंगली जीव भी बड़ी संख्या में पाए जाते हैं। अगर जंगल में शिकार प्रजाति कम हो जाए तो ये मांसाहारी प्राणी गांवों और रिहायशी इलाकों की ओर जा सकते हैं, जिससे मानव-वन्यजीव संघर्ष बढ़ने का खतरा रहता है। हिरण छोड़े जाने से जंगल में शिकार प्रजातियों की संख्या बढ़ेगी और इससे शिकारी प्राणी प्राकृतिक आहार पर ही केंद्रित रहेंगे।

सुरक्षित प्रक्रिया के बाद छोड़े गए हिरण

उन्होंने बताया कि सभी हिरणों का स्वास्थ्य परीक्षण और चिकित्सकीय जांच की गई। इसके बाद विशेष निगरानी और सुरक्षा के बीच उन्हें जंगल में छोड़ा गया। चित्तीदार हिरण शाकाहारी प्रजाति होने के साथ-साथ बाघ और तेंदुए जैसे शिकारी जीवों के लिए प्राकृतिक भोजन का अहम हिस्सा हैं। इनकी उपस्थिति से टाइगर रिज़र्व में संतुलित आहार श्रृंखला बनेगी और शिकारी जीव जंगल के भीतर ही सक्रिय रहेंगे।

ग्रामीणों में उत्साह और उम्मीद

हिरणों को छोड़े जाने के समय आसपास के ग्रामीण भी मौजूद रहे। बच्चों और महिलाओं ने हिरणों को खुले जंगल में दौड़ते हुए देखा और इसे प्रकृति संरक्षण की दिशा में बड़ा कदम बताया। ग्रामीणों का कहना है कि इससे वन्यजीवों की सुरक्षा के साथ-साथ पर्यटन की संभावनाएं भी बढ़ेंगी, जिससे उन्हें रोजगार और आजीविका के नए अवसर मिल सकते हैं।

वन विभाग की आगे की योजना

उपनिदेशक ने कहा है कि आने वाले समय में भी ऐसी पहलें जारी रहेंगी। विभाग का लक्ष्य जंगलों की जैव विविधता को सुरक्षित रखना और मानव-वन्यजीव संघर्ष को कम करना है। यह कदम न केवल पारिस्थितिक संतुलन के लिए अहम है बल्कि छत्तीसगढ़ को वन्यजीव पर्यटन के क्षेत्र में मजबूत पहचान दिलाने में भी मदद करेगा।

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com