स्वदेशी समाधान की ओर कदम : रायपुर में आयुर्वेदिक संगोष्ठी में डायबिटीज से निजात के उपायों पर मंथन
महर्षि चरक जयंती पर हुई संगोष्ठी में आयुर्वेद, पंचगव्य, योग, और जीवनशैली सुधार
मधुमेह नियंत्रण के स्वदेशी उपायों पर विशेषज्ञों ने रखे विचार
रायपुर @ शंकरनगर स्थित सिंधु पैलेस में विश्व आयुर्वेद परिषद द्वारा महर्षि चरक जयंती के अवसर पर "डायबिटीज (मधुमेह) रोग का स्वदेशी समाधान" विषय पर एक विशेष संगोष्ठी का आयोजन किया गया। इस आयोजन में चिकित्सा, शिक्षा और सामाजिक क्षेत्रों से जुड़े कई गणमान्य नागरिकों ने भाग लिया। संगोष्ठी में डायबिटीज जैसी गंभीर बीमारी से निपटने के लिए आयुर्वेदिक, योगिक और स्वदेशी उपायों पर विस्तार से चर्चा हुई। कार्यक्रम के मुख्य अतिथि विधायक सुनील सोनी ने अपने महापौर कार्यकाल को याद करते हुए बताया कि राजधानी रायपुर में एक समय 8 आयुर्वेद औषधालय संचालित थे, लेकिन वर्तमान में एक भी सक्रिय नहीं है। उन्होंने दैनिक जीवन में आयुर्वेद की उपयोगिता पर जोर देते हुए इसके प्रचार-प्रसार में सहयोग का आश्वासन दिया।
हेमचंद यादव विश्वविद्यालय के कुलपति डॉ. संजय तिवारी ने विदेशों में बढ़ती आयुर्वेद की लोकप्रियता, वैज्ञानिकता और इम्युनिटी बढ़ाने में इसकी भूमिका पर विस्तार से प्रकाश डाला। संत डॉ. युधिष्ठिरलाल ने ऐसी संगोष्ठियों को निरंतर आयोजित करते रहने की प्रेरणा दी। डायबिटीज को "साइलेंट किलर" बताते हुए कामधेनु विश्वविद्यालय के पूर्व निदेशक डॉ. पी.एल. चौधरी ने पंचगव्य चिकित्सा से इसके समाधान की बात कही। डॉ. मनोहर लहेजा ने जीवनशैली में सुधार को जरूरी बताया, वहीं डॉ. अजय कुलश्रेष्ठ ने आयुर्वेदिक औषधियों और योग के लाभ साझा किए। समाजसेवी लद्धाराम नैनवानी ने एक्सरसाइज से अपने डायबिटीज मुक्त जीवन का अनुभव बताया। कार्यक्रम का संचालन गिरधारी सागर ने किया, जिन्होंने हर पौधे में औषधीय गुणों की जानकारी दी। संगोष्ठी की शुरुआत दीप प्रज्ज्वलन और धन्वंतरि वंदना से हुई। इस अवसर पर शहर के 50 से अधिक गणमान्य नागरिक उपस्थित थे, जिनमें डॉक्टर, वैद्य, सामाजिक कार्यकर्ता और भाजपा नेता शामिल थे।

