भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू: ₹5.4 लाख करोड़ का निर्यात खतरे में!
भारत पर 50% अमेरिकी टैरिफ लागू: ₹5.4 लाख करोड़ का निर्यात खतरे में!
70% तक घट सकती है ज्वेलरी-कपड़ों की मांग, लाखों नौकरियों पर संकट; मशीनरी, सी-फूड, फार्मा समेत कई सेक्टर प्रभावित
नई दिल्ली। अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामानों पर आज से 50% टैरिफ लागू कर दिया। ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) की रिपोर्ट के मुताबिक, इस फैसले से भारत के करीब ₹5.4 लाख करोड़ के एक्सपोर्ट पर असर पड़ेगा।
सबसे ज्यादा झटका जेम्स-ज्वेलरी, टेक्सटाइल और मशीनरी सेक्टर को लग सकता है। अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद महंगे हो जाने से इनकी मांग 70% तक घटने का अनुमान है। इसका सीधा असर लाखों नौकरियों और भारत की जीडीपी पर पड़ेगा।
यही वजह है, भारत अब यूरोप, मिडिल ईस्ट और अफ्रीका जैसे नए बाजारों पर फोकस कर रहा है और कई देशों से फ्री ट्रेड एग्रीमेंट (FTA) की कोशिशें तेज हो गई हैं।
जेम्स-ज्वेलरी:
अमेरिका में कीमतें बढ़ने से निर्यात में 15-30% गिरावट, कारीगरों की नौकरियों पर खतरा।
टेक्सटाइल:
कपड़ों की मांग 20-25% तक घट सकती है।
मशीनरी व ऑटो पार्ट्स:
₹30,000 करोड़ का निर्यात प्रभावित, छोटे-मध्यम उद्यमों पर सीधा असर।
सी-फूड:
₹24,000 करोड़ का कारोबार खतरे में, 2 करोड़ लोगों की आजीविका प्रभावित हो सकती है।
फार्मा:
अभी छूट, लेकिन 250% तक टैरिफ की धमकी।
जीडीपी ग्रोथ पर असर
विशेषज्ञों के अनुसार, इससे भारत की जीडीपी ग्रोथ 0.2% से 0.6% तक कम हो सकती है। अमेरिका को निर्यात घटने से सरकार की कमाई भी प्रभावित होगी।
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टैरिफ क्या है और ट्रम्प ने भारत पर क्यों लगाया?
- टैरिफ यानी आयात शुल्क, जो दूसरे देश से आने वाले सामान पर लगाया जाता है।
- ट्रम्प का आरोप है कि भारत अमेरिकी सामान पर ज्यादा टैक्स लगाता है और इसी "जैसे को तैसा" नीति के तहत उन्होंने 50% टैरिफ थोप दिया।
भारत-अमेरिका ट्रेड डील की क्या स्थिति है?
- दोनों देश लंबे समय से ट्रेड डील पर बातचीत कर रहे हैं, लेकिन एग्रीकल्चर जैसे मुद्दों पर सहमति नहीं बन पाई।
- सितंबर-अक्टूबर तक समझौते की उम्मीद है, हालांकि अभी बातचीत अधर में है।
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