निर्माण विभागों में विसंगतियों और अफसरशाही को लेकर कांट्रेक्टर लामबंद.
छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन की राजधानी में बैठक हुई इसमें निर्माण विभागों में मनमानी और विसंगतियों को लेकर कांक्ट्रेक्टरों में रोष जताया है। उनका आरोप है कि, समय पर बिलों का भुगतान नहीं होने से न तो निर्माण कार्य आगे बढ़ जाते हैं और उनमें तेजी आती है। ऐसे में विभागों के आला अधिकारियों का सबसे ज्यादा दबाव ठेकेदारों पर ही होता है। बैठक में राज्य सरकार के सामने निर्माण संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से रखने का निर्णय लिया गया।
रायपुर. छत्तीसगढ़ कांट्रेक्टर एसोसिएशन की राजधानी में बैठक हुई इसमें निर्माण विभागों में मनमानी और विसंगतियों को लेकर कांक्ट्रेक्टरों में रोष जताया है। उनका आरोप है कि, समय पर बिलों का भुगतान नहीं होने से न तो निर्माण कार्य आगे बढ़ जाते हैं और उनमें तेजी आती है। ऐसे में विभागों के आला अधिकारियों का सबसे ज्यादा दबाव ठेकेदारों पर ही होता है। बैठक में राज्य सरकार के सामने निर्माण संबंधी मुद्दों को प्रमुखता से रखने का निर्णय लिया गया।
एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष बीरेश शुक्ला का कहना है कि राज्य के विकास में कांक्ट्रेक्टरों की अहम भूमिका होती है, लेकिन विभागीय अफसरों द्वारा समस्याओं का निराकरण करने के बजाय हर स्तर पर जटिल प्रक्रिया उत्पन्न करने में ही ज्यादा दिलचस्पी दिखाते हैं। इसके पीछे अफसरों की क्या मंशा है, यह समझ से परे हैं। ऐसे रवैए से निर्माण कार्य प्रभावित होते हैं और कांक्ट्रेक्टर अनावश्यक रूप से परेशान होते हैं। जबकि निर्माण कार्यों की प्रक्रिया ऐसी होती है कि लाखों रुपए की सामग्री उधारी में लेना पड़ता है और जब विभागों से बिलों का भुगतान होता है तब ट्रेडर्स को बकाया चुकाते हैं, परंतु स्थिति यह है कि निर्माण विभागों में अफसरशाही और मनमानी की वजह से करोड़ों रुपए का बिल छह महीने से लेकर एक साल से पेंडिंग हैं, जिसका भुगतान नहीं किया जा रहा है। जबकि डिवीजन स्तर पर मेजरमेंट और बिल बनने के बाद भी भुगतान नहीं किया जाता है। इसका सीधा असर निर्माण कार्यों पर पड़ता है।
एसोसिएशन के अनुसार सबसे अधिक दिक्कतें पीडब्ल्यूडी में निर्मित की जा रही हैं। 10 करोड़ से कम निविदाओं वाले काम करने वाले ठेकेदार परेशान हैं। क्योंकि समय पर बिलों का भुगतान नहीं किया जाता है। बिल फाइनल होने के बाद भी मुख्य अभियंता और प्रमुख अभियंता कार्य पालन अभियंता स्तर के अधिकारियों द्वारा रोका जा रहा है। वहीं बड़े-बड़े प्रोजेक्ट वाले कार्यों में भुगतान को लेकर ज्यादा दिक्कतें नहीं की जाती हैं। ऐसे सभी मसलों पर प्रदेश के सभी जगहों के कांक्ट्रेक्टरों ने राज्य स्तरीय बैठक की।

