दंतेवाड़ा में सौर ऊर्जा की नई किरण: गाँव-गाँव तक हरित रोशनी
आस्था विद्या मंदिर में 75 किलोवाट सोलर प्लांट, बिजली बचत और पर्यावरण संरक्षण की अनोखी मिसाल
रायपुर। कभी माओवाद की चुनौतियों से जूझने वाला दंतेवाड़ा आज विकास और हरित ऊर्जा का नया केंद्र बन रहा है। जावंगा स्थित आस्था विद्या मंदिर में 75 किलोवाट का एलिवेटेड ग्राउंड-माउंटेड सोलर पावर प्लांट स्थापित किया गया है, जो अब पूरे क्षेत्र के लिए प्रेरणा बन गया है। छत्तीसगढ़ राज्य अक्षय ऊर्जा विकास अभिकरण (क्रेडा) की अगुवाई और मेसर्स स्विचसोल सिस्टम्स एंड सर्विसेज प्रा. लि. के सहयोग से तैयार इस परियोजना ने न केवल बिजली की समस्या दूर की है, बल्कि पर्यावरण संरक्षण की दिशा में भी मजबूत कदम बढ़ाया है।
यह सोलर प्लांट हर साल लगभग 1.18 लाख यूनिट बिजली पैदा करेगा। इससे स्कूल को करीब 8.26 लाख रुपये की सालाना बचत होगी, जिसे बच्चों की शिक्षा, लैब, खेल और अन्य सुविधाओं पर खर्च किया जाएगा। बिजली बचत के साथ-साथ यह परियोजना ऊर्जा आत्मनिर्भरता की ओर भी कदम है। खास बात यह है कि सोलर पैनल्स के नीचे का क्षेत्र पार्किंग, सांस्कृतिक कार्यक्रम, खेलकूद और सामुदायिक सभाओं के लिए भी इस्तेमाल किया जा सकता है, जिससे इसका लाभ केवल स्कूल तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि पूरे समुदाय को मिलेगा।
सौर ऊर्जा का सबसे बड़ा फायदा पर्यावरण को है। इस प्लांट से हर साल लगभग 106 टन कार्बन उत्सर्जन कम होगा। इसका मतलब है—कम प्रदूषण, स्वच्छ हवा और जलवायु परिवर्तन के खिलाफ एक मजबूत योगदान। यही कारण है कि इसे "ग्रीन कैंपस" की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है।
मुख्यमंत्री विष्णु देव साय के सुशासन और विजन का यह परिणाम है कि दंतेवाड़ा जैसे दूरस्थ और पहले माओवाद प्रभावित क्षेत्र में भी स्वच्छ और सस्ती ऊर्जा पहुंच रही है। उनका उद्देश्य है कि हर गाँव और कस्बा सौर ऊर्जा से जगमगाए, जिससे न सिर्फ बिजली की कमी दूर हो, बल्कि रोजगार, शिक्षा और पर्यावरण संरक्षण को भी बढ़ावा मिले।
क्रेडा अध्यक्ष भूपेन्द्र सवन्नी और सीईओ राजेश सिंह राणा की टीम ने इस परियोजना को समय पर और उच्च गुणवत्ता के साथ पूरा किया। दोनों का मानना है कि सौर ऊर्जा सिर्फ बिजली का साधन नहीं, बल्कि सामाजिक बदलाव और आत्मनिर्भरता का आधार है। इस परियोजना में स्थानीय लोगों को भी प्रशिक्षण देकर स्थापना और रखरखाव का काम सिखाया गया, जिससे उन्हें रोजगार के नए अवसर मिले।
आस्था विद्या मंदिर का यह कदम बाकी स्कूलों, कॉलेजों और सामुदायिक केंद्रों के लिए भी एक मिसाल है। यह दिखाता है कि नवीकरणीय ऊर्जा अपनाकर हम न केवल बिजली बिलों में बचत कर सकते हैं, बल्कि आने वाली पीढ़ियों के लिए स्वच्छ और सुरक्षित पर्यावरण भी छोड़ सकते हैं। दंतेवाड़ा का यह सोलर प्लांट साबित करता है कि अगर इच्छाशक्ति और सही दिशा हो, तो विकास और पर्यावरण संरक्षण एक साथ संभव है।

