ज़ेब्रा क्रॉसिंग गायब, सड़कों पर 'रेड ज़ोन' में तब्दील हुए चौक-चौराहे  पैदल यात्रियों की जान पर बन आई

Aug 1, 2025 - 17:54
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ज़ेब्रा क्रॉसिंग गायब, सड़कों पर 'रेड ज़ोन' में तब्दील हुए चौक-चौराहे  पैदल यात्रियों की जान पर बन आई
ज़ेब्रा क्रॉसिंग गायब, सड़कों पर 'रेड ज़ोन' में तब्दील हुए चौक-चौराहे  पैदल यात्रियों की जान पर बन आई
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शहर के 100 से अधिक प्रमुख चौराहों पर नहीं दिखते ज़ेब्रा क्रॉसिंग और स्टॉप लाइन
स्मार्ट सिटी दावे हुए फेल, पैदल चलने वाले सबसे ज्यादा संकट में

 
दिनेश यदु @ रायपुर। राजधानी के चौक-चौराहों की हालत ऐसी हो गई है कि जैसे पैदल चलना कोई अपराध हो। ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और ट्रैफिक संकेतक सिर्फ कागजों में रह गए हैं। शहर को स्मार्ट सिटी बनाने की बात तो खूब हुई, लेकिन बुनियादी ट्रैफिक इंफ्रास्ट्रक्चर की घोर अनदेखी आज आम नागरिकों की जान पर भारी पड़ रही है। स्थिति ये है कि शहर के सबसे व्यस्त चौराहों पर भी पैदल चलने वालों के लिए कोई सुरक्षित रास्ता मौजूद नहीं। 
राजधानी में ट्रैफिक पुलिस एक तरफ नियमों की धज्जियां उड़ाने वालों पर लगातार चालानी कार्रवाई कर रही है, वहीं दूसरी ओर ज़मीनी हकीकत यह है कि ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और अन्य आवश्यक संकेतकों की भारी कमी के कारण ट्रैफिक नियंत्रण बुरी तरह प्रभावित हो रहा है। कालीबाड़ी, शास्त्री चौक, घड़ी चौक, जयस्तंभ चौक, मेकाहारा चौक, फाफाडीह, देवेंद्र नगर और आमापारा जैसे प्रमुख चौराहों पर या तो ज़ेब्रा क्रॉसिंग पूरी तरह गायब हैं या धुंधली हो चुकी हैं। यही नहीं, डामरीकरण के बाद नई रोड मार्किंग कराना तो दूर, पुरानी लाइनें तक दोबारा नहीं बनाई गईं।

सिग्नल आगे तक वाहन खड़े, राहगीर संकट में

कालीबाड़ी चौक और शास्त्री चौक जैसे इलाकों में वाहन चालक सिग्नल से कई मीटर आगे तक गाड़ियों को खड़ा कर देते हैं। नतीजा यह होता है कि पैदल चलने वालों के लिए सिग्नल पर खड़े रहना और सड़क पार करना खतरे से खाली नहीं होता। पुलिस महज चालान काटने तक ही सीमित है, लेकिन स्टॉप लाइन का पालन करवाने की कोई सक्रिय कोशिश नज़र नहीं आती।

मेकाहारा चौक बना ‘हॉटस्पॉट ऑफ रिस्क’

मेकाहारा चौक जहां रोजाना हजारों मरीज और उनके परिजन आते-जाते हैं, वहां ज़ेब्रा क्रॉसिंग जैसी मूलभूत सुविधा तक नहीं है। यही स्थिति फाफाडीह और देवेंद्र नगर जैसे रिहायशी और व्यस्त इलाकों में भी देखी जा सकती है, जहां सिग्नल पर वाहन जहां-तहां रुकते हैं, जिससे जाम और अव्यवस्था चरम पर है।

71881 चालान, फिर भी कोई सुधार नहीं

जनवरी से जून 2025 तक रायपुर ट्रैफिक पुलिस ने कुल 71881 चालानी कार्रवाई की है। इनमें सिग्नल जंपिंग, स्टॉप लाइन उल्लंघन, रांग साइड ड्राइविंग और अन्य नियम तोड़ने की घटनाएं शामिल हैं। अकेले रांग साइड में 14211 चालान काटे गए हैं, जबकि संकेत उल्लंघन में 409 मामले सामने आए हैं।

जानलेवा साबित हो रही लापरवाही

इस साल राजधानी में अब तक 1008 सड़क दुर्घटनाएं हो चुकी हैं, जिनमें 326 लोगों की मौत हुई है। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बुनियादी ट्रैफिक संकेत और पैदल यात्रियों की सुविधा को प्राथमिकता दी जाए, तो इन आंकड़ों में बड़ा सुधार आ सकता है।

सड़क एजेंसियों की जिम्मेदारी तय, पर अमल नहीं

स्मार्ट सिटी प्रोजेक्ट के तहत सहायक प्रबंधक शुभम कुमार ने माना है कि ज़ेब्रा क्रॉसिंग, स्टॉप लाइन और अन्य चिन्हों को हर 3 साल में दोबारा बनाना अनिवार्य है और इसकी जिम्मेदारी सड़क निर्माण एजेंसी की होती है। लेकिन ज़मीनी हालात बताते हैं कि इस नियम की घोर अनदेखी हो रही है।

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com