NSE के एक फैसले ने BSE को दिया 1000 वॉट का करंट, एक झटके में 9 परसेंट टूट गया शेयर

नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के एक फैसले ने देश के सबसे पुराने एक्सचेंज के पसीने छुड़ा दिए हैं. एक ही झटके में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज 9 फीसदी तक टूट गया

Mar 5, 2025 - 01:07
Mar 5, 2025 - 01:07
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NSE के एक फैसले ने BSE को दिया 1000 वॉट का करंट, एक झटके में 9 परसेंट टूट गया शेयर
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नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) के एक फैसले ने देश के सबसे पुराने एक्सचेंज के पसीने छुड़ा दिए हैं. एक ही झटके में बॉम्बे स्टॉक एक्सचेंज 9 फीसदी तक टूट गया है. दरअसल, NSE ने अपने फ्यूचर्स एंड ऑप्शन्स (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी डे को बदलने का फैसला लिया है. इस फैसले से निवेशकों पर तो असर होने ही है, मगर देश की सबसे पुरानी एक्सचेंज बीएसई को भी तगड़ा करंट लगा. एनएसई के फैसले ने निवेशकों के मन में कई सवाल भी खड़े कर दिए हैं. आखिर यह फैसला क्यों लिया गया? पोर्टफोलियो पर इसका क्या असर पड़ सकता है?
5 मार्च की सुबह एशिया के सबसे पुराने स्टॉक एक्सचेंज बीएसई (BSE) के शेयरों में 9% की गिरावट देखी गई. यह गिरावट तब हुई जब इसके प्रतिद्वंद्वी नेशनल स्टॉक एक्सचेंज (NSE) ने सभी फ्यूचर्स और ऑप्शन (F&O) कॉन्ट्रैक्ट्स के एक्सपायरी डे को गुरुवार की बजाय सोमवार कर दिया. यह बदलाव 4 अप्रैल से प्रभावी होगा. इसका मतलब है कि अब सभी निफ्टी इंडेक्स के साप्ताहिक F&O कॉन्ट्रैक्ट्स का एक्सपायरी डे महीने के आखिरी सोमवार को होगा, न कि गुरुवार को. इसके अलावा, NSE ने बैंक निफ्टी, फिननिफ्टी, निफ्टी मिडकैप सेलेक्ट और निफ्टी नेक्स्ट50 के F&O कॉन्ट्रैक्ट्स की एक्सपायरी डे को भी महीने के आखिरी सोमवार कर दिया है. यह बदलाव 4 अप्रैल, 2025 से लागू होगा. क्यों लिया गया ऐसा फैसला? NSE के एक प्रवक्ता ने इस फैसले के पीछे की वजह बताते हुए कहा, “यह फैसला किसी आंकड़े या फायदे के आधार पर नहीं लिया गया है. यह सप्ताहांत के दौरान होने वाली भू-राजनीतिक घटनाओं को ध्यान में रखते हुए लिया गया है. सोमवार का दिन एक्सपायरी के लिए बेहतर माना गया है. हमें इस पर फीडबैक भी मिल रहा है, लेकिन हमने यह फैसला एफिशिएंसी को ध्यान में रखकर लिया है. अगर जरूरत पड़ी तो हम इसकी समीक्षा भी करेंगे.” क्या शुक्रवार को बढ़ेगी ट्रेडिंग? विशेषज्ञों का मानना है कि इस बदलाव से शुक्रवार को ट्रेडिंग एक्टिविटी बढ़ सकती है, क्योंकि निवेशक सप्ताहांत तक अपनी पोजीशन को होल्ड करने के बजाय उसे क्लोज करना पसंद कर सकते हैं. यह कदम NSE के लिए ऑप्शन मार्केट में अपनी हिस्सेदारी बढ़ाने की कोशिश का हिस्सा भी माना जा रहा है. इस खबर के बाद BSE के शेयरों में भारी गिरावट देखी गई. सुबह 9:45 बजे, NSE पर BSE के शेयरों की कीमत 4,163.4 रुपये थी, जो पिछले चार महीनों के निचले स्तर पर थी. 10:45 बजे तक गिरावट घटकर लगभग 6 फीसदी रह गई और भाव 4,180 रुपये के आसपास आ गया था. निवेशकों को सट्टेबाजी से बचाना है टारगेट: NSE NSE के मुख्य बिजनेस डेवलपमेंट ऑफिसर श्रीराम कृष्णन ने CNBC-TV18 को दिए एक इंटरव्यू में कहा, “रेगुलेटर का मानना है कि एक्सपायरी वाले दिनों को कम करने से सट्टेबाजी पर लगाम लगेगी. इसका प्रभावी समाधान यह हो सकता है कि सभी एक्सचेंजों के लिए हफ्ते में एक ही एक्सपायरी दिन हो.” उन्होंने यह भी कहा कि निवेशकों को ऑप्शन ट्रेडिंग के जोखिमों के बारे में जागरूक करना जरूरी है, और यह उनकी जिम्मेदारी है. इससे पहले, अंतरराष्ट्रीय ब्रोकरेज फर्म गोल्डमैन सैक्स ने BSE के शेयरों के टारगेट प्राइस को घटाकर 4,880 रुपये कर दिया था, जो पहले 5,650 रुपये था. गोल्डमैन सैक्स ने BSE के शेयरों पर न्यूट्रल रेटिंग बनाए रखी है. ब्रोकरेज फर्म ने कहा कि BSE का लगभग 70 फीसदी एवरेज डेली टर्नओवर प्रोप्राइटरी ट्रेडर्स से आता है. भारतीय प्रतिभूति और विनिमय बोर्ड (SEBI) ने 24 फरवरी को जारी एक परामर्श पत्र में निवेशकों के जोखिम को मापने के लिए एक नया तरीका प्रस्तावित किया है.
Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com