सेना ने कैसे लिया पहलगाम का बदला?
ऑपरेशन महादेव: जानिए इस ऑपरेशन की टाइमलाइन और रोमांचक कहानी
भास्कर दूत ब्यूरो
नई दिल्ली। 22 अप्रैल, 2025- जम्मू-कश्मीर का पहलगाम। एक शांत, पर्यटन स्थल अचानक गोलियों और चीख़ों से गूंज उठा। लश्कर-ए-तैयबा के आतंकियों ने कायराना हरकत करते हुए धर्म पूछकर 26 निर्दोष नागरिकों की हत्या कर दी। देश आक्रोशित था और प्रधानमंत्री के निर्देश पर सुरक्षा एजेंसियों ने सटीक और निर्णायक जवाब की तैयारी शुरू कर दी।
चार महीने की खुफिया निगरानी और रणनीतिक योजना के बाद, 28 जुलाई 2025 को भारतीय सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस ने मिलकर ऑपरेशन महादेव को अंजाम दिया। इस ऑपरेशन में पहलगाम नरसंहार के दोषी तीनों आतंकियों को ढेर कर देश को न्याय दिलाया गया।
ऑपरेशन महादेव: मिनट-टू-मिनट टाइमलाइन
रात 2:00 बजे
खुफिया ब्रेकथ्रू
आतंकियों ने T82 अल्ट्रासेट एन्क्रिप्टेड कम्युनिकेशन डिवाइस का उपयोग किया।
तकनीकी टीम ने सिग्नल इंटरसेप्ट कर डाचिगाम के जंगलों में उनकी सटीक लोकेशन का पता लगाया।
सुबह 8:00 बजे
ड्रोन की निगरानी शुरू
पहला सर्विलांस ड्रोन उड़ाया गया।
ऑपरेशन के लिए बैस फॉर्मेशन तय किया गया।
सुबह 9:30 बजे
राष्ट्रीय राइफल्स और पैरा कमांडो की एंट्री
सेना की काउंटर-इंसर्जेंसी यूनिट RR और पैरा SF ने महादेव पहाड़ी पर पोज़िशन ली।
जंगल को तीन दिशाओं से घेर लिया गया।
सुबह 10:00 बजे
आतंकियों का पहला विजुअल
कमांडो ने पहली बार आतंकियों को लाइव स्पॉट किया।
30 मिनट के भीतर उनकी पहचान की पुष्टि हो गई- सुलेमान उर्फ फैज़ल (लश्कर कमांडर), अफ़गान और जिब्रान।
सुबह 11:00 बजे
ऑपरेशन की शुरुआत
सुरक्षाबलों ने पहली फायरिंग में ही तीनों को गंभीर रूप से घायल कर दिया।
आतंकियों ने भागने की कोशिश की, लेकिन रिंग फॉर्मेशन ने उन्हें बाहर निकलने नहीं दिया।
सुबह 11:45 बजे
तीसरा आतंकी भी ढेर
घायल आतंकी ने अंतिम बार बच निकलने की कोशिश की, पर उसे भी वहीं समाप्त कर दिया गया।
दोपहर 12:30 बजे
सर्च और एरिया डोमिनेशन
मुठभेड़ स्थल के 2 किमी रेडियस में क्लीनिंग ऑपरेशन।
कोई अतिरिक्त आतंकी या विस्फोटक नहीं मिला।
दोपहर 12:45 बजे
ऑपरेशन सफलता के साथ पूरा
तीनों आतंकियों की पहचान, तस्वीरें और डाक्यूमेंटेशन पूरा किया गया।
यह जानकारी तुरंत गृहमंत्री अमित शाह और सेना मुख्यालय को भेजी गई।
रणनीतिक और भावनात्मक जीत
ऑपरेशन महादेव ने यह साबित कर दिया कि भारत अब आतंकियों के हर हमले का सटीक और त्वरित जवाब देता है।
सेना, सीआरपीएफ और जम्मू-कश्मीर पुलिस के संयुक्त साहस और तकनीकी दक्षता ने पहलगाम की शहादत का बदला लिया।
यह अभियान देश के हर नागरिक के मन में गर्व और विश्वास की नई भावना जगाता है।

