आपदा में जीवन रक्षा, रायपुर पहुंचा चलता-फिरता अस्पताल, 20 मिनट में तैयार होगा 200 बेड
नक्सली घटना और आपदा में मिल सकेगी आपातकालीन चिकित्सा
जल्द ही इसके कामकाज को लेकर चलाया जाएगा जागरूकता अभियान
भास्कर दूत रायपुर , 8 अगस्त 2025, स्वास्थ्य के क्षेत्र में प्रदेश में नित नई सुविधाएं लोगों को प्रदान की जा रही है। शहरों से लेकर सुदूर ग्रामीण इलाकों में भी बेहतर स्वास्थ्य सुविधाएं पहुंचाने का प्रयास जारी है । अब इसी क्रम में आरोग्य मैत्री क्यूब चिकित्सा सुविधा यानि की पोर्टेबल अस्पताल की सुविधा राजधानी को मिली है। दूसरे शब्दों में कहें तो चलता फिरता अस्पताल ‘पोस्ट-डिजास्टर रिस्पॉन्स पोर्टेबल हॉस्पिटल’, जो अब एम्स रायपुर पहुंच चुका है। इस आधुनिक और पोर्टेबल हॉस्पिटल का उद्घाटन स्वास्थ्य मंत्री ने बीते दिनों किया है।
आपदा के समय जिंदगियां बचाने में सक्षम अस्पताल का एम्स रायपुर में डेमो और अवेयरनेस अभियान चलाया जाएगा, ताकि राज्यभर के डॉक्टर्स और मेडिकल स्टाफ इसे समझें और आपदा के समय इसे तत्काल उपयोग में ला सकें। इसका कुल वजन 800 किलोग्राम है, जिसमें 72 क्यूब और 2 पैलेट स्टैंड होते हैं। हर क्यूब का वजन 20 किलो है। क्यूब फायरप्रूफ और वाटरप्रूफ है।
पोर्टेबल अस्पताल विशेषता -
इसे "आरोग्य मैत्री क्यूब" या "भीष्म क्यूब" भी कहा जाता है, एक अद्वितीय, स्वदेशी रूप से विकसित चिकित्सा प्रणाली है जिसे आपदा प्रबंधन और आपातकालीन स्थितियों में त्वरित चिकित्सा सहायता प्रदान करने के लिए डिज़ाइन किया गया है। यह 72 छोटे, मौसमरोधी क्यूब्स में पैक किया जाता है, जिन्हें आसानी से हवाई जहाज, ड्रोन, हेलीकॉप्टर जल ,सड़क मार्ग या साइकिल द्वारा कहीं भी ले जाया जा सकता है। यह प्राकृतिक आपदाओं, युद्ध क्षेत्रों, या अन्य संकटों में इस्तेमाल किया जा सकता है। 20 मिनट में तैयार होंगे 200 बेड ।
आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं-
इसमें एक्स-रे, अल्ट्रासाउंड, मॉनिटरिंग डिवाइस, आईसीयू, ओपीडी, ऑपरेशन थिएटर, बेड, दवाएं और भोजन जैसी सभी आवश्यक चिकित्सा सुविधाएं शामिल हैं। विभिन्न प्रकार की आपात स्थितियों के लिए उपयुक्त है। 200 से अधिक रोगियों का इलाज एक क्यूब अस्पताल से किया जा सकता है और 100 रोगियों को 48 घंटे तक बेड पर रखा जा सकता है ।
किसने किया तैयार -
भीष्म पोर्टेबल हॉस्पिटल को स्वास्थ्य मंत्रालय, रक्षा मंत्रालय और राष्ट्रीय सुरक्षा परिषद ने मिलकर तैयार किया है। इसका उद्देश्य आपदा की घड़ी में जान बचाना और सीमावर्ती या दुर्गम क्षेत्रों में भी विश्वस्तरीय इलाज उपलब्ध कराना है।

