संघ का सबसे ज्यादा विरोध हुआ, फिर भी हम डटे हैं - मोहन भागवत

Aug 27, 2025 - 20:21
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संघ का सबसे ज्यादा विरोध हुआ, फिर भी हम डटे हैं - मोहन भागवत
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नई दिल्ली। राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (आरएसएस) अपने 100 साल पूरे करने जा रहा है। इस मौके पर दिल्ली में हुए कार्यक्रम में सरसंघचालक मोहन भागवत ने कहा कि संघ जितना विरोध झेल चुका है, उतना कोई संगठन नहीं झेल पाया। बावजूद इसके स्वयंसेवकों के मन में समाज के लिए प्रेम और सेवा की भावना कायम रही। भागवत का संदेश साफ था— विरोध के बीच भी सेवा और सत्य ही असली ताकत हैं।

भागवत के भाषण की बड़ी बातें 
संघ और विरोध : जितना विरोध संघ का हुआ, उतना किसी संगठन का नहीं हुआ। फिर भी स्वयंसेवक समाज-सेवा में लगे हैं।
स्वयंसेवा का असली इनाम : संघ में कोई इंसेंटिव नहीं, बल्कि जिम्मेदारी और त्याग है। असली संतोष निस्वार्थ सेवा से मिलता है।
दुनिया और शांति : आज दुनिया कट्टरता और 'वोकिज़्म' जैसी सोच से जूझ रही है। जोड़ने वाली ताकतें कमजोर हो रही हैं।
हिंदू राष्ट्र का मिशन : हिंदूपन का मतलब है– सत्य और प्रेम। भारत का लक्ष्य है– विश्व कल्याण।
धर्म का अर्थ : धर्म का मतलब कनवर्ज़न नहीं, बल्कि सत्य और जीवन मूल्य हैं। यही भारत की असली ताकत है।
विवेकानंद की सीख : भारत धर्मप्रधान देश है और दुनिया को समय-समय पर दिशा देना उसका कर्तव्य है।
आर्थिक विकास बनाम पर्यावरण : केवल विकास की दौड़ से असमानता और पर्यावरण संकट बढ़ा है। भारत संयम और संतुलन से आगे बढ़ने का रास्ता दिखाता है।
भारत की अच्छाई : समाज में जितनी बुराई दिखती है, उससे कई गुना ज्यादा अच्छाई मौजूद है। मीडिया सिर्फ नकारात्मकता से तस्वीर अधूरी दिखाता है।

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com