बच्चों में बढ़ता मोबाइल का जाल: मानसिक स्वास्थ्य पर असर
राज्यसभा में मानसिक स्वास्थ्य, मिलावट और पुलिसकर्मियों की सुविधाओं पर गूंजी चिंता
विशेष संवाददाता
नई दिल्ली। राज्यसभा में सोमवार को भाजपा सांसदों ने तीन अहम मुद्दों पर गंभीर चिंता जताई - बच्चों के अत्यधिक मोबाइल फोन उपयोग, खाद्य पदार्थों में मिलावट और सांसदों के साथ तैनात पुलिसकर्मियों की सुविधाएं। सदस्यों ने सरकार से इन विषयों पर ठोस कदम उठाने और स्पष्ट दिशानिर्देश जारी करने की मांग की।
मोबाइल का अत्यधिक उपयोग और बच्चों का मानसिक स्वास्थ्य
भाजपा सांसद अजीत माधवराव गोपछडे ने कहा कि बच्चों में स्मार्टफोन का अत्यधिक उपयोग मानसिक और शारीरिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रहा है।
उन्होंने चेतावनी दी कि यह आदत चिंता, अवसाद, चिड़चिड़ापन, मोटापा, डायबिटीज, हृदय रोग, समय से पहले बुढ़ापा और बाल सफेद होने जैसी समस्याओं को कम उम्र में ही जन्म दे रही है।
इसके अलावा, आंखों की परेशानी, नींद की कमी और पढ़ाई में ध्यान न लगना भी इसके दुष्प्रभाव हैं। उन्होंने सरकार से इस पर विस्तृत राष्ट्रीय दिशानिर्देश जारी करने की मांग की।
पुलिसकर्मियों के लिए सुविधाओं की मांग
भाजपा सांसद बृज लाल ने मंत्रियों और सांसदों के साथ तैनात पुलिसकर्मियों को संसद भवन परिसर में प्रवेश न मिलने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि ऐसे पुलिसकर्मी अक्सर तेज गर्मी, बारिश और ठंड जैसे प्रतिकूल मौसम का सामना करते हैं, इसलिए उन्हें आवश्यक सुविधाएं दी जानी चाहिए।
खाद्य पदार्थों में मिलावट पर चिंता
भाजपा सदस्य सिकंदर कुमार ने खाद्य पदार्थों में मिलावट को “गंभीर खतरा” बताया। उन्होंने कहा कि खतरनाक रंग और रसायन मिलाकर लोगों की सेहत से खिलवाड़ हो रहा है, लेकिन मिलावट करने वालों को कानून का डर नहीं है। उन्होंने सरकार से कड़े कानूनों के सख्ती से पालन और दोषियों पर त्वरित कार्रवाई की मांग की।

