1 अगस्त 2025 से बदल रहे हैं UPI के नियम: जानिए नए बदलाव और इनका असर
नई दिल्ली। देशभर में करोड़ों लोगों द्वारा उपयोग किए जा रहे यूनिफाइड पेमेंट इंटरफेस (UPI) में 1 अगस्त 2025 से कई महत्वपूर्ण बदलाव लागू हो रहे हैं। भारतीय राष्ट्रीय भुगतान निगम (NPCI) और बैंकों के सहयोग से यह कदम डिजिटल भुगतान के सुरक्षित और संतुलित संचालन को सुनिश्चित करने के लिए उठाया गया है। आइए विस्तार से समझते हैं कि पुराने नियम क्या थे, अब क्या बदलेगा और आम उपभोक्ताओं पर इसका क्या प्रभाव पड़ेगा।
अब एक तय सीमा तक ही ट्रांजैक्शन संभव
पहले UPI लेन-देन पर कोई मासिक सीमा नहीं थी, लेकिन अब प्रत्येक UPI यूज़र के लिए ₹3 लाख की मासिक सीमा तय कर दी गई है। यह सीमा पार करने पर अतिरिक्त सत्यापन या मामूली शुल्क लागू हो सकता है। इसका उद्देश्य सिस्टम पर लोड को नियंत्रित करना और धोखाधड़ी को कम करना है।
बड़ी राशि के ट्रांजैक्शन होंगे अधिक सुरक्षित
यदि कोई व्यक्ति ₹50,000 से अधिक की राशि का ट्रांजैक्शन करना चाहता है, तो अब उसे दो-स्तरीय प्रमाणीकरण (जैसे OTP या बायोमेट्रिक वेरिफिकेशन) से गुजरना होगा। इससे वित्तीय लेन-देन में सुरक्षा और पारदर्शिता सुनिश्चित की जाएगी।
निष्क्रिय UPI ID होगी स्वचालित रूप से बंद
यदि कोई UPI ID छह महीने तक निष्क्रिय रहती है, यानी उसका उपयोग नहीं किया गया, तो वह ID स्वतः डिएक्टिवेट कर दी जाएगी। यह कदम अनावश्यक डेटा लोड और संभावित मिसयूज को रोकने के लिए उठाया गया है।
वॉलेट और बैंक खाता अब अलग से दिखेगा
पहले UPI पेमेंट के दौरान यह स्पष्ट नहीं होता था कि भुगतान बैंक खाते से हो रहा है या वॉलेट से। अब यह अंतर साफ-साफ इंटरफेस पर दर्शाया जाएगा, जिससे उपयोगकर्ताओं को स्रोत की स्पष्ट जानकारी मिलेगी।
ऑटो डेबिट मैंडेट की पुन: पुष्टि जरूरी
अगर आपने किसी ऐप, ओटीटी प्लेटफॉर्म या अन्य सेवा के लिए ऑटो डेबिट चालू किया है, तो अब हर छह महीने में आपको उस अनुमति को फिर से कन्फर्म करना होगा। यह सुनिश्चित करेगा कि बिना उपयोगकर्ता की जानकारी के पैसे नहीं कटें।
बैलेंस चेक पर सीमा
अब एक UPI ऐप पर दिन में अधिकतम 50 बार ही बैलेंस चेक किया जा सकेगा। यदि किसी व्यक्ति के पास कई ऐप हैं, तो प्रत्येक पर यह सीमा लागू होगी। उपयोगकर्ताओं को सलाह दी गई है कि वे पीक आवर्स (जैसे सुबह 9–11, शाम 6–8 बजे) में बैलेंस चेक से बचें।
ऑटो-पे ट्रांजैक्शन का समय बदला
UPI के माध्यम से होने वाले ऑटो-पेमेंट (जैसे EMI या सब्सक्रिप्शन शुल्क) अब केवल नॉन-पीक आवर्स में ही प्रोसेस होंगे — सुबह 10:00 बजे से पहले, दोपहर 1:00 से 5:00 बजे के बीच, और रात 9:30 बजे के बाद।
UPI ट्रांजैक्शन स्टेटस चेक की सीमा
अब एक ट्रांजैक्शन का स्टेटस अधिकतम तीन बार ही चेक किया जा सकेगा, और हर चेक के बीच कम से कम 90 सेकंड का अंतर रखना होगा।
लिंक्ड अकाउंट चेकिंग पर भी सीमा
प्रत्येक UPI ऐप से एक दिन में अधिकतम 25 बार ही लिंक्ड बैंक अकाउंट्स की जानकारी देखी जा सकेगी।
बेनेफिशियरी नाम पहले ही दिखेगा
अब जब आप किसी को भुगतान करने जा रहे होंगे, तो ट्रांजैक्शन कन्फर्म करने से पहले ही उस व्यक्ति के बैंक में रजिस्टर्ड नाम और बैंक का नाम दिखेगा। इससे गलत खाते में पैसे भेजने की संभावना कम होगी और फ्रॉड से भी बचाव होगा।
उपयोगकर्ताओं पर असर
ये सभी बदलाव UPI को और अधिक सुरक्षित, व्यवस्थित और विश्वसनीय बनाने की दिशा में एक महत्वपूर्ण कदम हैं। हालांकि कुछ यूजर्स को सीमाओं के कारण असुविधा हो सकती है, लेकिन डिजिटल लेन-देन की पारदर्शिता और सुरक्षा के लिए यह आवश्यक है। अगर आप नियमित UPI यूज़र हैं, तो इन नए नियमों को ध्यान में रखते हुए अपने भुगतान व्यवहार को थोड़ा बदलना आपके हित में होगा।
अधिक जानकारी और बैंक/UPI सेवा प्रदाता से पुष्टि के लिए संबंधित ऐप्स या बैंक की वेबसाइट अवश्य देखें।

