बड़ा फैसला :अस्पतालों में 5 दिन बंद रहेगी आयुष्मान योजना

Sep 2, 2025 - 09:32
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बड़ा फैसला :अस्पतालों में 5 दिन बंद रहेगी आयुष्मान योजना
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7 साल से पैकेज दरें नहीं बढ़ने से नाराज है अस्पताल प्रबंधन, लिया फैसला

रायपुर, 1 सितंबर , एसोसिएशन ऑफ हेल्थकेयर प्रोवाइडर्स ऑफ़ इंडिया (एएचपीआई) की छत्तीसगढ़ स्तरीय सामान्य सभा में आयुष्मान भारत योजना को लेकर गहरा असंतोष देखने को मिला। प्रदेश सरकार के रवैय्यै पर प्रदेश भर के स्पेशियालिटी डॉक्टर्स ने बैठक कर 7 सालों से इलाज पैकेज दर के नहीं बढ़ने को लेकर असंतोष जताते हुए अस्पतालों ने 5 दिनों तक आयुष्मान योजना को (टोकन बंद) सांकेतिक बंद का फैसला लिया। साथ ही साथ एसोसिएशन ने प्रदेश की जनता से इसके लिए खेद भी व्यक्त किया। 

एएचपीआई के प्रदेश अध्यक्ष एवं इएनटी विशेषज्ञ डॉ. गुप्ता की अध्यक्षता में आहुत बैठक का मुख्य केंद्र बिंदु राज्य स्तरीय नोडल एजेंसी की असंतोषजनक कार्यप्रणाली और लगातार लंबित भुगतान रहा। इस मामले पर उपस्थित संस्थान के सदस्यों ने गहरी चिंता व्यक्त करते हुए एक स्वर से बताया कि आयुष्मान योजना में पिछले 7 वर्षों मैं पैकेज दर बढ़ाई नहीं गई है जबकि प्रतिवर्ष चिकित्सा दरों में बढ़ोतरी की दर 12% से अधिक है। यहां तक की 2022 में नेशनल हेल्थ अथॉरिटी की अनुशंसा भी नहीं लागू हो पाई है।

बैठक में रखी गई मांगें

एएचपीआई छत्तीसगढ़ चैप्टर के अध्यक्ष डॉ. राकेश गुप्ता ने बताया कि स्वास्थ्य विभाग से बातचीत के लिए अस्पतालों ने एकमत से प्रमुख मांगें रखी हैं। इनमें मुख्य रूप से 1.पैकेज दरों में बढ़ोतरी – विशेषज्ञों की कमेटी बनाकर पैकेज दरों की एकमुश्त और तार्किक बढ़ोतरी की जाए तथा वार्षिक बढ़ोतरी का प्रावधान हो। 2. लंबित भुगतान – 2022, 2023 और 2024 के पुनर्जीवित मामलों के भुगतान जल्द किए जाएं। 3. पारदर्शी ऑडिटिंग – डिस्चार्ज मरीजों के केस का 45 दिन में निपटारा विशेषज्ञों की टीम और नोडल एजेंसी की मदद से हो। 4.ब्याज प्रावधान – 45 दिन से ज्यादा लंबित भुगतान पर 1% ब्याज लागू किया जाए। 

इसलिए सांकेतिक बंद की चेतावनी

जनवरी से मार्च 2025 और जुलाई 2025 तक लंबित भुगतान न मिलने की स्थिति में अस्पताल राज्य स्तरीय सांकेतिक बंद पर विचार करेंगे। साथ ही एएचपीआई का राष्ट्रीय नेतृत्व अन्य राज्यों से समन्वय बनाकर केंद्र सरकार और स्वास्थ्य मंत्रालय से इस मुद्दे पर बातचीत करेगा, ताकि प्रदेश के गरीब और वंचित वर्गों के इलाज में बाधा न आए।

Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com