अब कांग्रेस देगी 'कुर्बानी'... यूपी उपचुनाव में नहीं उतारेगी प्रत्याशी, सभी सीटों पर सपा को समर्थन

<strong>लखनऊ.</strong> हरियाणा विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्बानी दी थी और अब बारी कांग्रेस पार्टी की है. उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों

Oct 20, 2024 - 01:04
Oct 20, 2024 - 01:04
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अब कांग्रेस देगी 'कुर्बानी'... यूपी उपचुनाव में नहीं उतारेगी प्रत्याशी, सभी सीटों पर सपा को समर्थन
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लखनऊ. हरियाणा विधानसभा चुनाव में समाजवादी पार्टी ने कुर्बानी दी थी और अब बारी कांग्रेस पार्टी की है. उत्तर प्रदेश की 9 विधानसभा सीटों पर होने वाले उपचुआव में कांग्रेस ने प्रत्याशी न उतारने का मन बनाया है. इंडिया गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस को दो सीटें गाजियाबाद और खैर सीट दी है. लेकिन कांग्रेस दोनों ही सीट पर अपने जीत को लेकर आश्वस्त नहीं है. लिहाजा अब उसने उपचुनाव से अपने कदम पीछे खींचने का फैसला किया है. वह अब सभी सीटों पर समाजवादी पार्टी के प्रत्याशी का समर्थन करेगी. इसका ऐलान कांग्रेस की तरफ से जल्द किया जा सकता है.
दरअसल, कांग्रेस की तरफ से पांच सीटों की डिमांड की गई थी. कांग्रेस ने समाजवादी पार्टी से उन सीटों की मांग की थी जहां बीजेपी को 2022 के चुनाव में हार मिली थी. लेकिन बात नहीं बन पाई तो कांग्रेस की तरफ से फूलपुर और मंझवा सीट मांगी गई. लेकिन अखिलेश यादव ने इन दोनों ही सीटों पर प्रत्याशी उतार दिए. हालांकि, गठबंधन के तहत समाजवादी पार्टी ने गाजियाबाद और अलीगढ़ की खैर सीट कांग्रेस के लिए छोड़ दी. इन दोनों ही सीटों पर इंडिया गठबंधन के लिए राह आसान नहीं है. यहां बीजेपी काफी मजबूत है. यही वजह है कि कांग्रेस अपने हिस्से की दो सीटों को बदलवाना चाह रही थी, लेकिन बात नहीं बनी, जिसके बाद अब कांग्रेस ने मन बना लिया है कि वह अपने हिस्से की दोनों सीटों को भी सपा को दे देगी. ताकि कार्यकर्ता का मनोबल न टूटे  कांग्रेस सूत्रों के मुताबिक लोकसभा चुनाव में 6 सीटें जीतने के बाद पार्टी कार्यकर्ताओं का मनोबल बढ़ा है. अब उसकी निगाहें 2027 के विधानसभा चुनाव पर है. कांग्रेस नहीं चाहती की गाजियाबाद और खैर सीट पर उपचुनाव लड़कर वह हारे और कार्यकर्ताओं का मनोबल टूटे. साथ ही कांग्रेस गठबंधन के तहत त्याग का सन्देश भी देना चाहती है. ठीक वैसे ही जैसा हरियाणा चुनाव में सीट न मिलने के बाद अखिलेश यादव ने कहा था कि बीजेपी को हराने के लिए वह कुर्बानी दे रहे हैं. हारने से बेहतर न लड़ा जाये दरअसल, कांग्रेस के खाते में जो दो सीटें गई हैं, वहां सपा की स्थिति भी ठीक नहीं है. 2022 के विधानसभा चुनाव में गाजियाबाद में बीजेपी को  61.37 फीसदी, सपा को 18.25 फीसदी और कंग्रेस को 4.81 फीसदी वोट मिले थे. यहां तक कि लोकसभा चुनाव में भी बीजेपी ने इस सीट को बड़े अंतर से जीता था. लोकसभा चुनाव में गठबंधन के तहत यह सीट कांग्रेस के खाते में थी. यही हाल खैर विधानसभा सीट का रहा. 2022 के विधानसभा चुनाव में बीजेपी के अनूप प्रधान को इस सीट पर 55 फीसदी से अधिक वोट मिले थे, जबकि रालोद को 16 फीसदी से अधिक वोट मिले थे. यहां सपा और रालोद का संयुक्त प्रत्याशी मैदान में था. कांग्रेस को महज 0.6 प्रतिशत वोट मिले थे. आंकड़ों के हिसाब से दोनों ही सीट पर सपा कांग्रेस गठबंधन के बावजूद कमजरो नजर आती है. ऐसे में कांग्रेस नेताओं का मानना है कि चुनाव लड़कर हारने से बेहतर है कि न लड़कर सपा को समर्थन दिया जाए, जिससे कार्यकर्ताओं का मनोबल बना रहे.
Bhaskardoot Digital Desk www.bhaskardoot.com